बड़कुले: गोबर के वो खिलौने, जिनमें बचपन और परंपरा दोनों बसते हैं! 🌸✨
क्या आपने भी बचपन में दादी-नानी के साथ मिलकर बड़कुले (गुलरिया) बनाए हैं? गाय के गोबर से बने ये छोटे-छोटे ढाल, तलवार और सूरज-चाँद सिर्फ कलाकृति नहीं, बल्कि होलिका माता का ‘दहेज’ माने जाते हैं।
🔥 होलिका दहन में इन्हें अर्पित करना घर की नकारात्मकता को दूर करने और सुख-समृद्धि लाने का प्रतीक है।होली से कुछ दिन पहले गाय के गोबर से छोटे-छोटे खिलौने बनाए जाते हैं जिन्हें ‘बड़कुले’ या ‘भरभोलिया’ कहते हैं।
प्रतीकों का अर्थ:
ढाल और तलवार: बुरी शक्तियों से रक्षा के प्रतीक।
सूरज और चाँद: सुखद भविष्य और निरंतरता के प्रतीक।
वैज्ञानिक पहलू:
होलिका दहन में गोबर के उपलों और बड़कुलों का जलना वातावरण को शुद्ध करने और हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करने में मदद करता है।
भाई-बहन का प्रेम:
कई जगह बहनें अपने भाइयों की नजर उतारने के लिए बड़कुले की माला का प्रयोग करती हैं
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