News desk| होली के त्योहार पर गुझिया केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि उत्तर भारत से लेकर विदेशों तक फैला एक करोड़ो का व्यापार है। यहाँ इस पर विस्तृत कंटेंट दिया गया है:

  1. भारत में गुझिया का बाजार और कारोबार (Market Dynamics)
    होली के दौरान भारत में मिठाइयों का बाजार अपने चरम पर होता है। आंकड़ों के अनुसार:
    कुल टर्नओवर: एक अनुमान के मुताबिक, होली के सीजन में पूरे देश में गुझिया और संबंधित स्नैक्स का कारोबार ₹2,000 करोड़ से ₹5,000 करोड़ के बीच होता है।
    डिमांड में उछाल: होली के 10 दिन पहले से ही हलवाइयों और दुकानों गुझिया की बिक्री में 300% से 500% की वृद्धि देखी जाती है।
    अब केवल मावा गुझिया ही नहीं, बल्कि चॉकलेट गुझिया, केसर-पिस्ता गुझिया, और शुगर-फ्री गुझिया की बढ़ती मांग ने बाजार के आकार को और बड़ा कर दिया है।
  2. विदेशों में गुझिया की भारी डिमांड (International Demand)
    भारतीय प्रवासियों (Diaspora) की वजह से होली का क्रेज विदेशों में भी बढ़ा है, जिससे गुझिया का निर्यात (Export) तेज हुआ है:
    मुख्य देश: सबसे ज्यादा मांग USA (अमेरिका), UK (ब्रिटेन), कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और UAE (दुबई) में रहती है।
    ऑनलाइन डिलीवरी: Ferns N Petals (FNP) और IGP.com जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोग विदेशों में बैठे अपने रिश्तेदारों को ताजी गुझिया भेजते हैं।
    फ्रोजन मार्केट: विदेशों में ‘रेडी-टू-ईट’ फ्रोजन गुझिया का मार्केट भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसे लोग भारतीय स्टोर से खरीदकर तलते हैं।
  3. रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
    गुझिया का सीजन स्थानीय स्तर पर भारी रोजगार पैदा करता है:
    खोया (मावा) मंडी: होली पर मावे की मांग इतनी बढ़ जाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों से दूध की आपूर्ति और मावा बनाने वाले कारीगरों की आय दोगुनी हो जाती है।
    कारीगरों की मांग: इस दौरान कुशल हलवाइयों को उत्तर प्रदेश और राजस्थान से देश के अलग-अलग कोनों में विशेष रूप से गुझिया बनाने के लिए बुलाया जाता है।
  4. कंटेंट हेडलाइंस (सोशल मीडिया के लिए)
    “होली की मिठास या करोड़ों का बिजनेस: जानिए कैसे गुझिया बदलती है देश की इकॉनमी!”
    “सात समंदर पार भी गूंजी गुझिया की खनक: न्यूयॉर्क से लंदन तक बढ़ी डिमांड।”
    “मावा, मैदा और मुनाफा: इस होली गुझिया मार्केट ने तोड़े पुराने सारे रिकॉर्ड।”

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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