हनुमान जी का जन्म केवल एक वानर राज के घर नहीं हुआ, बल्कि वे शिव के 11वें रुद्र अवतार हैं। उनका जन्म उसी दिव्य खीर से हुआ जिससे भगवान राम का जन्म हुआ था। जब राजा दशरथ की रानियों के लिए यज्ञ की खीर तैयार हुई, तो पवन देव के माध्यम से उसका एक अंश माता अंजना (जो पूर्व जन्म में अप्सरा पुंजिकस्थला थीं) तक पहुँचा। इसी कारण हनुमान जी और श्री राम का रिश्ता ‘भ्रातृवत’ और ‘प्राणवत’ है।हनुमान जी की माता अंजना पूर्व जन्म में एक स्वर्ग की अप्सरा थीं, जिनका नाम
पुंजिकस्थला था।
मुक्ति का मार्ग: जब उन्होंने क्षमा मांगी, तो ऋषि ने बताया कि उनका यह श्राप तभी समाप्त होगा जब वे भगवान शिव के एक अंश (पुत्र) को जन्म देंगी।
श्राप का कारण: एक बार उन्होंने अनजाने में एक तपस्वी ऋषि के साथ शरारत की, जिससे क्रोधित होकर ऋषि ने उन्हें वानर मुख वाली नारी बनने का श्राप दे दिया।
2. हनुमान जयंती 2026 की तिथि (News Update)
- तारीख: 2 अप्रैल, 2026 (गुरुवार)
- शुभ मुहूर्त: सुबह 06:10 से 07:44 तक (पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ)।
- विशेष: इस दिन गुरुवार होने के कारण ‘गुरु-हनुमान’ संयोग बन रहा है, जो ज्ञान और शक्ति की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ है।
बजरंगबली को प्रसन्न करने पान का बीड़ा और ‘श्री राम’ लिखे हुए पीपल के 11 पत्तों की माला।चमेली के तेल में मिला हुआ नारंगी सिंदूर हनुमान जी को अत्यंत प्रिय है।
पसंदीदा भोग: मोतीचूर या बेसन के लड्डू, गुड़-चना, और तुलसी के पत्ते हनुमान जी के भोग में तुलसी अनिवार्य मानी जाती है)।
फूल और वस्त्र: लाल या पीले रंग के फूल (खासकर गेंदा या चमेली) और लाल रंग के वस्त्र या लंगोट।
साधारण लड्डू के स्थान पर हनुमान जी को ‘अपूप’ (शुद्ध घी और गुड़ के मालपुए) या ‘केसरिया भात’ का भोग लगाएं। यदि शनि या राहु का कष्ट हो, तो उड़द दाल के वड़ों की माला अर्पित करें। याद रखें, हर भोग में तुलसी दल (पत्ता) डालना अनिवार्य है, अन्यथा बजरंगबली उसे स्वीकार नहीं करते।
4. गुप्त पूजा विधि (The Hidden Ritual)
सोया हुआ भाग्य जगाने के लिए ‘चोला चढ़ाने’ की यह गुप्त विधि अपनाएं:
- विधि: चमेली के तेल में नारंगी सिंदूर मिलाएं। सबसे पहले हनुमान जी के चरणों में सिंदूर लगाएं, फिर पूरी प्रतिमा पर नीचे से ऊपर की ओर लेप करें।
- पीपल के पत्ते का उपाय: 11 पीपल के साफ पत्तों पर चंदन से ‘श्री राम’ लिखें और इसकी माला बनाकर हनुमान जी को पहनाएं। इससे कठिन से कठिन कार्य सिद्ध हो जाते हैं।
5. वह शक्तिशाली महामंत्र (The Supreme Mantra)
पूजा के दौरान सामान्य चालीसा के साथ इस सिद्ध मंत्र का 108 बार जाप करें:
“ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय, सर्व-शत्रु-संहारणाय, सर्वरोग-हराय, सर्ववशीकरणाय, रामदूताय स्वाहा।”
यह मंत्र न केवल शत्रुओं का नाश करता है, बल्कि घर से नकारात्मक ऊर्जा और बीमारियों को भी दूर रखता है।
