News Desk| गणगौर पूजा 21 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन पड़ता है और भगवान शिव (गण) और माता पार्वती(गौर) की आराधना का प्रतीक है।
2026 की महत्वपूर्ण तिथियां और समय
- मुख्य पूजा तिथि: 21 मार्च 2026।
- उत्सव की अवधि: होली के अगले दिन (चैत्र कृष्ण प्रतिपदा) से शुरू होकर यह पर्व 18 दिनों तक चलता है। 2026 में इसकी शुरुआत 4 मार्च से हो चुकी है।
- शुभ मुहूर्त: पूजा के लिए सूर्योदय के तुरंत बाद का समय सबसे शुभ माना गया है।
ताजा समाचार और अपडेट (मार्च 2026)
- सामूहिक पूजन: जयपुर के प्रसिद्ध गोविंददेवजी मंदिर में पहली बार गणगौर का सामूहिक पूजन आयोजित किया गया है।
- परंपरा टूटी: राजस्थान के बारां शहर में वित्तीय संकट और सरकारी सहयोग की कमी के कारण इस वर्ष 128 साल पुरानी गणगौर शोभायात्रा की परंपरा रुक गई है।
- कच्ची और पक्की गणगौर: वर्तमान में ‘कच्ची गणगौर’ की पूजा चल रही है, जो 8 दिनों तक चलती है, जिसके बाद ‘पक्की गणगौर’ की पूजा शुरू होगी।
- आधुनिकता का प्रभाव: बीकानेर जैसे शहरों में पारंपरिक मूर्तियों के साथ-साथ अब आधुनिक ज्वेलरी और नई मुद्राओं वाली गणगौर मूर्तियों की मांग बढ़ गई है।
प्रमुख परंपराएं
- उपवास: विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए और अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए 16 से 18 दिनों का व्रत रखती हैं।
- सिंजारा: उत्सव के दौरान नवविवाहितों के लिए उनके पीहर या ससुराल से घेवर, गहने और कपड़े भेजने की परंपरा (सिंजारा) निभाई जाती है।
- विसर्जन: उत्सव के अंतिम दिन महिलाएं मिट्टी के पात्रों और ईसर-गणगौर की मूर्तियों का जल विसर्जन करती हैं, जो मां गौरी की विदाई का प्रतीक है।
