मुंबई/नई दिल्ली: भारत का रेस्टोरेंट उद्योग इस समय एक अभूतपूर्व ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ा है। कमर्शियल एलपीजी (LPG) की भारी किल्लत के चलते आर्थिक राजधानी मुंबई में लगभग 20 फीसदी छोटे और मध्यम वर्गीय भोजनालय बंद होने की कगार पर पहुँच गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने अपने सदस्यों के लिए आपातकालीन एडवाइजरी जारी कर दी है।
क्या है पूरा संकट?
पिछले कुछ दिनों से कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में भारी गिरावट आई है। मुंबई की प्रमुख होटल संस्था AHAR के अनुसार, यदि अगले 48 से 72 घंटों में आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो शहर के 50 फीसदी से ज्यादा रेस्टोरेंट्स को मजबूरन अपनी सेवाएं रोकनी पड़ेंगी। यही हाल बेंगलुरु, पुणे और नागपुर जैसे मेट्रो शहरों का भी है।
क्यों कम हुई सप्लाई?
इस संकट के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण माने जा रहे हैं:
- वैश्विक तनाव: हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
- घरेलू प्राथमिकता: तेल विपणन कंपनियों ने कथित तौर पर कमर्शियल सप्लाई के बजाय घरेलू गैस (Domestic LPG) की मांग को पूरा करने पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है।
एसोसिएशन की ‘सर्वाइवल’ एडवाइजरी
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने अपने लाखों सदस्यों को इस संकट से निपटने के लिए कुछ कड़े कदम उठाने की सलाह दी है:
- मेनू को छोटा करें: उन डिशेज को मेनू से अस्थायी रूप से हटा दें जिन्हें पकने में अधिक समय या ज्यादा आंच की जरूरत होती है।
- बिजली का सहारा: गैस पर निर्भरता कम करने के लिए इंडक्शन कुकटॉप्स, माइक्रोवेव और इलेक्ट्रिक ग्रिल्स का अधिकतम उपयोग करें।
- सीमित कार्य समय: गैस बचाने के लिए होटल के संचालन घंटों (Opening/Closing time) में कटौती करें।
कालाबाजारी का डर
सप्लाई कम होने का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। जो सिलेंडर आमतौर पर ₹1,800 के करीब मिलता था, उसकी कालाबाजारी अब ₹3,000 प्रति सिलेंडर तक होने की खबरें आ रही हैं। इससे रेस्टोरेंट मालिकों की लागत (Cost) बढ़ गई है, जिसका सीधा असर आम आदमी की थाली की कीमतों पर पड़ना तय है।
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