2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में विजय थलपति की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) की ऐतिहासिक जीत ने राज्य की 50 साल पुरानी द्रविड़ राजनीति (DMK-AIADMK) को हिलाकर रख दिया है।
यहाँ विजय के अभिनेता से राजनेता बनने और उनकी इस बड़ी जीत का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:
1. अभिनेता से जननायक: एक सुनियोजित सफर
विजय का राजनीति में आना कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। उन्होंने दशकों तक अपनी फिल्मों के माध्यम से एक ‘मसीहा’ की छवि गढ़ी।
- ग्राउंडवर्क: उन्होंने अपने प्रशंसक संघ ‘विजय मक्कल इयक्कम’ (VMI) को सालों तक सामाजिक कार्यों (रक्तदान, राहत कार्य) में व्यस्त रखा, जिससे उनके पास बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की एक मजबूत फौज तैयार हो गई।
- फिल्मों का संदेश: ‘मर्सल’, ‘सरकार’ और ‘कथ्थी’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने भ्रष्टाचार, किसानों के मुद्दे और स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रहार किया, जिससे जनता उन्हें पर्दे के बाहर भी एक विकल्प के रूप में देखने लगी।
2. जीत के प्रमुख कारण
- युवा शक्ति: विजय ने पहली बार वोट देने वाले युवाओं और उन लोगों को अपनी ओर खींचा जो DMK और AIADMK के बारी-बारी शासन से थक चुके थे।
- परिवर्तन की लहर: जनता को एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो द्रविड़ विचारधारा से अलग हटकर ‘ईमानदार प्रशासन’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ राजनीति की बात करे।
- सीधा संवाद: विजय ने बिना किसी बड़े गठबंधन के अकेले चुनाव लड़कर अपनी ताकत दिखाई, जिससे उनकी छवि एक साहसी नेता के रूप में उभरी।
3. पिछली सरकार (DMK) की हार की वजहें
- सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency): कानून-व्यवस्था और विशेषकर महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों ने सरकार की छवि को नुकसान पहुँचाया।
- भ्रष्टाचार के आरोप: विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों और परिवारवाद (वंशवाद) की राजनीति ने जनता में नाराजगी पैदा की।
- युवाओं से दूरी: DMK युवाओं की बदलती आकांक्षाओं और डिजिटल माध्यमों पर विजय की पकड़ का मुकाबला करने में विफल रही।
4. कांग्रेस के प्रति झुकाव और भाजपा की स्थिति
- कांग्रेस कनेक्शन: चुनाव परिणामों के बाद राहुल गांधी ने खुद विजय को फोन कर बधाई दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस अब DMK का साथ छोड़ TVK के साथ गठबंधन कर सकती है ताकि राज्य में अपनी खोई हुई शक्ति वापस पा सके।
- भाजपा की कमजोरी: तमिलनाडु में भाजपा की “हिंदी और उत्तर भारतीय” छवि अभी भी एक बड़ी बाधा है। विजय ने स्थानीय ‘तमिल पहचान’ को प्राथमिकता दी, जिससे भाजपा के लिए वहां जगह बनाना मुश्किल हो गया।
5. विजय का भविष्य और तमिलनाडु की नई दिशा
वर्तमान में विजय ‘सिंगल लार्जेस्ट पार्टी’ के रूप में उभरे हैं (करीब 107 सीटें)। वे अब एक स्थिर सरकार बनाने के लिए कांग्रेस या अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
तमिलनाडु का भविष्य: विजय की जीत के साथ राज्य में “फिल्म-राजनीति” का एक नया दौर शुरू हुआ है। यदि वे अपने ‘सुशासन’ और ‘प्रौद्योगिकी’ (AI मंत्रालय जैसे वादे) के एजेंडे पर टिके रहते हैं, तो तमिलनाडु आने वाले वर्षों में एक आधुनिक और प्रगतिशील राज्य के रूप में उभर सकता है।
