नई दिल्ली | पश्चिम एशिया (Middle East) में इज़राइल और ईरान के बीच छिड़ा भीषण युद्ध अब केवल सरहदों तक सीमित नहीं रहा है। इसकी तपिश भारत की रसोई और व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक पहुँच गई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बाधित होने से भारत की गैस आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह चरमरा गई है, जिससे देश भर में हाहाकार मचा है।
1. क्यों थम गई गैस की सप्लाई?
भारत अपनी जरूरत का 60% से अधिक एलपीजी आयात करता है। इस आयात का एक बड़ा हिस्सा ईरान के पास स्थित समुद्री मार्ग से होकर आता है। युद्ध के कारण इस रूट पर जहाजों की आवाजाही बंद होने से बंदरगाहों पर गैस के टैंकर नहीं पहुँच पा रहे हैं।
2. ‘नो गैस’ के बोर्ड:
दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में गैस न होने के कारण सैकड़ों छोटे-बड़े रेस्टोरेंट बंद हो गए हैं। जहां सप्लाई है, वहां कीमतें इतनी अधिक हैं कि मेन्यू कार्ड के दाम 30% तक बढ़ गए हैं। kai samcharo ke anusar, पुणे और हैदराबाद जैसे एजुकेशन हब में छात्रों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। कई हॉस्टल संचालकों ने गैस की कमी का हवाला देकर मेस (Mess) बंद कर दी है, जिससे छात्र बाहर खाने को मजबूर हैं।
जमाखोरी पर लगाम
बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) लागू कर दिया है।10 मार्च की ताज़ा बढ़ोतरी के बाद कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ₹100 से अधिक का उछाल देखा गया है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।
भारत अब केवल खाड़ी देशों पर निर्भर रहने के बजाय रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से गैस आयात करने की इमरजेंसी डील पर काम कर रहा है। साथ ही, घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए रिफाइनरियों को अतिरिक्त दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है जब भारत को ‘इलेक्ट्रिक कुकिंग’ (Induction) की ओर तेज़ी से कदम बढ़ाना होगा।
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