नई दिल्ली: भारत की आगामी जनगणना (2026-27) में सामाजिक बदलावों को ध्यान में रखते हुए एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। अब लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को भी जनगणना के दौरान ‘शादीशुदा’ (Married) माना जाएगा, बशर्ते वे खुद को एक ‘स्थिर संघ’ (Stable Union) के रूप में घोषित करें।
महत्वपूर्ण नियम और जुर्माना:
जनगणना अधिकारियों के अनुसार, यदि कोई जोड़ा साथ रह रहा है और खुद को पति-पत्नी के रूप में दर्ज कराना चाहता है, तो गणनाकार (Enumerator) उनके स्व-घोषणा (Self-declaration) को ही आधार मानेंगे। इसके लिए किसी कानूनी दस्तावेज या मैरिज सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं होगी।
हालांकि, जनगणना के नियमों के तहत गलत जानकारी देने या जानबूझकर तथ्य छिपाने पर ₹1,000 तक के जुर्माने का प्रावधान भी चर्चा में है, ताकि आंकड़ों की शुद्धता बनी रहे। सरकार का लक्ष्य इस डिजिटल जनगणना के जरिए देश की सही तस्वीर पेश करना है।
जनगणना 2026-27 के चरण और समय-सारणी
देश की यह 16वीं जनगणना दो मुख्य चरणों में पूरी की जाएगी:
| चरण | समय सीमा | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| पहला चरण (Phase I) | 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 | मकानों की सूची (Houselisting) और हाउसिंग जनगणना: इसमें घर की बनावट, कमरों की संख्या, और सुख-सुविधाओं (जैसे इंटरनेट, पानी, वाहन) की जानकारी ली जाएगी। |
| दूसरा चरण (Phase II) | फरवरी 2027 | जनसंख्या की गिनती (Population Enumeration): इसमें व्यक्तियों की उम्र, शिक्षा, धर्म, व्यवसाय और वैवाहिक स्थिति (Marital Status) जैसे व्यक्तिगत विवरण दर्ज होंगे। |
नोट: लद्दाख और उत्तराखंड जैसे बर्फबारी वाले क्षेत्रों में दूसरे चरण की शुरुआत सितंबर 2026 से ही हो जाएगी। इस बार नागरिक स्व-गणना (Self-enumeration) पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी खुद भी भर सकेंगे।
