नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय एकता और अखंडता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत अब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का अपमान करना एक गंभीर दंडात्मक अपराध माना जाएगा।
अब राष्ट्रीय गान के बराबर दर्जा
सरकार ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव के बाद ‘वंदे मातरम’ को वही कानूनी संरक्षण और गरिमा प्राप्त होगी, जो अब तक केवल राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और तिरंगे झंडे को मिलती थी। यह कदम लंबे समय से चल रही उस मांग को पूरा करता है जिसमें राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रीय गान के समान दर्जा देने की बात कही जा रही थी।
सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान
नए नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम के गायन में बाधा डालता है या किसी भी तरह से इसका सार्वजनिक रूप से अपमान करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल की सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। कानून को इतना सख्त बनाया गया है कि बार-बार अपराध दोहराने वाले व्यक्तियों के लिए न्यूनतम एक वर्ष की अनिवार्य जेल की सजा तय की गई है।
गायन के दौरान खड़े होना अनिवार्य
सजा के प्रावधानों के साथ-साथ सरकार ने नए प्रोटोकॉल भी जारी किए हैं। अब सार्वजनिक और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के गायन के दौरान उपस्थित सभी नागरिकों का सम्मानपूर्वक सावधान की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से देश की युवा पीढ़ी में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना अधिक प्रगाढ़ होगी।
यह कानून देश के हर नागरिक को राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी और सम्मान की याद दिलाएगा।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद, इस संशोधन विधेयक को संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) से पारित होने और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह आधिकारिक तौर पर पूरे देश में प्रभावी हो जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि 15 अगस्त, 2026 तक इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।
