News DesK| चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की शीतला सप्तमी (जिसे बसौड़ा भी कहा जाता है) 2026 में 10 मार्च, मंगलवार को मनाई जा रही है। यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत और राजस्थान में स्वास्थ्य और आरोग्यता के लिए मनाया जाता है।
प्रमुख विवरण (2026)
- तिथि: 10 मार्च 2026, मंगलवार।
- पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:24 से शाम 06:26 तक।
- सप्तमी तिथि प्रारंभ: 9 मार्च 2026 को रात 11:27 बजे।
- सप्तमी तिथि समाप्त: 11 मार्च 2026 को रात 01:54 बजे।
धार्मिक महत्व और परंपराएं
- बासी भोजन का भोग: शीतला माता को एक दिन पहले बना हुआ ठंडा भोजन (जैसे मीठे चावल, राबड़ी या दही) अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि माता को ठंडी चीजें प्रिय हैं क्योंकि वे अग्नि से उत्पन्न ज्वर और रोगों को शांत करती हैं。
- चूल्हा न जलाना: इस दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता और न ही चूल्हा जलाया जाता है। परिवार के सभी सदस्य बासी भोजन ही ग्रहण करते हैं।
- रोगों से मुक्ति: शीतला माता की पूजा चेचक (Smallpox), खसरा और संक्रमण जैसी बीमारियों से बचाव के लिए की जाती है।
- विशेष योग: इस वर्ष पूजा के दौरान सुबह 08:21 तक हर्षण योग और रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो कार्यों में सफलता और आरोग्यता के लिए फलदायी है।
आयोजन और मेला
- गुड़गांव शीतला माता मंदिर: हरियाणा के गुड़गांव (गुरुग्राम) स्थित शक्तिपीठ में चैत्र मेले का आयोजन हो रहा है, जहाँ लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं।
- राजस्थान में उत्सव: राजस्थान के विभिन्न शहरों में इस दिन लोक संगीत और पारंपरिक मेलों का आयोजन किया जाता है।
शीतला सप्तमी (बसौड़ा) पर मुख्य रूप से ये ठंडे पकवान बनते हैं:
- मीठे चावल (ओलिया): गुड़ या चीनी के साथ बने ठंडे चावल।
- राबड़ी: बाजरे या जौ के आटे को छाछ में पकाकर बनाई गई।
- पुए और पकौड़ी: मीठे गुलगुले और बेसन की पकौड़ी।
- दही-बड़ा: ठंडी दही में भिगोए हुए बड़े।
- बाजरे की रोटी: जो एक दिन पहले ही बना ली जाती है।
ये सब एक रात पहले (छठ की रात) बनाए जाते हैं और अगले दिन भोग लगाकर खाए जाते हैं।
