Category: Festival and Culture

आखिर क्या महत्व है अनंत सूत्र का!

News desk| गणेश विर्सजन की पूजा के साथ प्रसाद में आपको 14 गांठों वाला एक धागा मिलता होगा। जिसे ज्यादातर लोग अपने हाथ में बांधते हैं या गले में पहनते…

क्यों जरूरी है पितरों को तर्पण

न्यूज डेस्क। पितृ पक्ष में आप भी अपने पूर्वजों की आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो पूरे पितृ पक्ष तक अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और पूर्वजों को जल तर्पण जरूर…

चक्रधर समारोह नीलांगी कालंत्रे की प्रस्तुति

bastar| चक्रधर समारोह के आठवें दिन कथक की प्रख्यात गुरु नीलांगी कालंत्रे ने अपनी विलक्षण प्रस्तुति से ऐसा समां बाँधा कि पूरा कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।…

भूला गे हो का भाई… गणेश भगवान हरए

न्यूज डेस्क। गणपति पक्ष पर पूरे छत्तीसगढ़ सहित दक्षिण एवं मध्य भारत में भगवान गणेश की बड़े आव भगत के साथ पूजा की जा रही है। बड़ी-बड़ी मूर्तियों और पंडालों…

DDU ऑडिटोरियम में तीजा-पोरा त्यौहार की धूम

रायपुर,मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेवता पर राजधानी स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में तीजा-पोरा त्यौहार मनाया गया। ‘विष्णु भइया’ के नेवता पर आयोजित इस आयोजन में शामिल होने के…

हौ जी पोरा माटी ताए, पर मेहनत तो लग थे

न्यूज डेस्क। पोला त्योहार छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्योहारों में से एक है। मिट्टी के खेल-खिलौनों, बैलों की जोड़ी की इस त्योहार में प्रमुख रूप से पूजा होती है। हफ्ते भर…

भगवान कृष्ण की रेत से बनाई कलाकृति

पुरी। सेंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक द्वारा पुरी बीच में जनमाष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण के बाल रूप की खूबसूरत कलाकृति बनाई गई। जनमाष्टमी के अवसर पर समुद्र तट पर…

खीरे से होता है भगवान कृष्ण का जन्म

समाचार डेस्क, आज जन्माष्टमी है और भगवान के जन्मदिवस के अवसर पर बालगोपाल को विविध प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है जिसमें खीरे का अपना विशेष महत्व है।तो…

मदरसा बोर्ड सहित प्रदेश के मदरसों में किया गया ध्वजारोहण

रायपुर, छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड कार्यालय परिसर रायपुर में 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अध्यक्ष अलताफ अहमद ने ध्वजारोहण किया। ध्वजारोहण के पश्चात् सामूहिक रूप से राष्ट्रगान हुआ। इस…

हलषष्ठी में क्यों भिगोती हैं मां अपना आंचल

न्यूज डेस्क। भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथी को मनाया जाने वाला त्योहार है हलषष्ठी। जो कमरछट्ठ या ललही छठ, बलराम जयंती के रूप में भी जाना जाता है।…