न्यूज डेस्क। पितृ पक्ष में आप भी अपने पूर्वजों की आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो पूरे पितृ पक्ष तक अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और पूर्वजों को जल तर्पण जरूर करें। इस तर्पण मात्र से आपके रूकते हुए कार्य बनने लगेंगे।
शास्त्रों के अनुसार, तर्पण करने से पितृ बहुत खुश होते हैं। केवल श्राद्ध तिथि नहीं बल्कि पूरे पितृ पक्ष यानि अमावस्या तक पितरों को जल तर्पण करना चाहिए। अगर आप तालाब नहीं जा सकते हैं तो घर पर ही एक पात्र में आप अपने पूर्वजों को तर्पण कर सकते हैं। जब आप तर्पण करंे तो जल को हथेली में लेकर अंगूठे की सहायता से गिराते जाएं। ऐसा 7 बार करें और पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें। इस दौरान उंगली में कुशा जरूर धारण करें। इस उपाय से भी पितृ बहुत खुश होते हैं।
अगर आप बहुत बिजी है किसी नदी तट या तीर्थ स्थल पर श्राद्ध के लिए नहीं जा सकते हैं तो आप अपने घर पर ही श्राद्ध की प्रक्रिया कर धूप दीप जलाकर पितरों को भोजन अर्पित करें। इसके लिए एक उपले को सुलगा कर इसके ऊपर घी-गुड़ मिलाकर डालें। साथ ही घर में बने भोजन के 5 ग्रास भी इस पर डालें। ऐसा करते समय ऊं पितृभ्यो नमरू मंत्र भी बोलें।
श्राद्ध तिथि के दिन अपनी इच्छा अनुसार, जरूरतमंदों को अनाज का दान करें। अगर अनाज ज्यादा न हो तो एक मुट्ठी अनाज भी आप दान कर सकते हैं। सच्चे मन से किए गए एक मुट्ठी अनाज के दान से भी पितृ बहुत खुश होते हैं।
मृत परिजन की श्राद्ध तिथि पर गाय, कुत्ते को रोटी खिलाएं। छत पर पक्षियों के लिए अनाज और पानी की व्यवस्था करें। ब्राह्म्ण भोज व दान करें।
पितृपक्ष में कोई भी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, दुकान का मुहूर्त, नया कारोबार का आरंभ आदि नहीं करना चाहिए।किसी के साथ भी छल कपट आदि न करें। ब्रह्मचर्य का पालन करना बेहद जरूरी है।
पितृपक्ष में कोई भी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, दुकान का मुहूर्त, नया कारोबार का आरंभ आदि नहीं करना चाहिए।किसी के साथ भी छल कपट आदि न करें। ब्रह्मचर्य का पालन करना बेहद जरूरी है।
शराब, प्याज, मांसाहार, सफेद तिल, लौकी, मूली, लहसुन, सत्तू आदि का सेवन वर्जित माना जाता है।
पितरों के लिए खाना बिना चखे बनाए| गाय, ब्राह्मण, कुत्ता, भिखारी का अपमान न करें।
तर्पण के लिए दोपहर का समय उत्तम माना जाता है। इसलिए ब्रह्म मुहूर्त में श्राद्ध न करें।

