new delhi| केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय के बावजूद अनिवार्य सेवा शुल्क वापस न करने के मामले में पांच रेस्तरां- मखना डेली, ज़ीरो कोर्टयार्ड, कैसल बारबेक्यू, चायोस और फिएस्टा बाय बारबेक्यू नेशन के खिलाफ़ स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें रेस्तरांओं को सेवा शुल्क राशि वापस करने का निर्देश दिया गया है।

इस कदम का उद्देश्य किसी भी रेस्तरां में सेवाएं प्राप्त करते समय उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त राशि का भुगतान करने के लिए पड़ने वाले अनुचित दबाव को कम करना है, क्योंकि किसी भी होटल या रेस्तरां को उपभोक्ता को सेवा शुल्क का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता अथवा किसी अन्य नाम से उपभोक्ताओं से सेवा शुल्क भी वसूला नहीं जा सकता है।

28 मार्च 2025 को, दिल्ली उच्च न्यायालय ने सेवा शुल्क पर सीसीपीए के दिशा-निर्देशों को बरकरार रखा। इसके बाद, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) पर प्राप्त शिकायतों के माध्यम से केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) के संज्ञान में आया कि शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ रेस्तरां उपभोक्ताओं से पूर्व सहमति प्राप्त किए बिना अनिवार्य सेवा शुल्क लगाना जारी रखे हुए हैं, जिससे उपभोक्ता अधिकारों का हनन हो रहा है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अनुसार, ये रेस्तरां अनुचित व्यापार व्यवहार में लिप्त हैं।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की स्थापना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 10 के अंतर्गत की गई थी। इसका प्राथमिक कार्य उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन, अनुचित व्यापार कार्य प्रणालियो और असत्य या भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित मामलों को विनियमित करना है जो आम जनता और उपभोक्ताओं के हितों के लिए हानिकारक हैं।

ये कहते हैं नियम

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने 4 जुलाई 2022 को होटलों और रेस्तराओं में सेवा शुल्क के संबंध में अनुचित व्यापार प्रथाओं पर अंकुश लगाने और उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन दिशा-निर्देशों में निम्नलिखित प्रावधान हैं, कोई भी होटल या रेस्तरां भोजन बिल में स्वचालित रूप से या डिफ़ॉल्ट रूप से सेवा शुल्क नहीं जोड़ेगा| किसी अन्य नाम से सेवा शुल्क की वसूली नहीं की जाएगी। कोई भी होटल या रेस्तरां उपभोक्ता को सेवा शुल्क का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं करेगा तथा उपभोक्ता को स्पष्ट रूप से सूचित नहीं करेगा कि सेवा शुल्क स्वैच्छिक, वैकल्पिक तथा उपभोक्ता के विवेक पर निर्भर है। सेवा शुल्क के संग्रह के आधार पर उपभोक्ताओं पर प्रवेश या सेवाओं के प्रावधान पर  कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा। सेवा शुल्क को भोजन बिल के साथ जोड़कर तथा कुल राशि पर जीएसटी लगाकर नहीं वसूला जाएगा।

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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