डेस्क न्यूज। नवरात्रि में माॅं दुर्गा की पूजा हर सुहागन के लिए विशेष होती है। सौभाग्य की कामना के लिए महिलाएं माॅं दुर्गा के नौ दिन तक व्रत करने के साथ, नौ तरह के भोग व श्रृंगार सामग्री अर्पित करती हैं। नौवे दिन माॅं दुर्गा के स्वागत में नौ कन्याओं को भोजन कराया जाता है और उनसे आशीर्वाद लिया जाता है।
हिन्दू रीति-रिवाजों का हम बड़ी निष्ठा के साथ पालन करते हैं, लेकिन वहीं अपने शास्त्रों में बतलाई गई बातों को भूल जाते हैं और भूल कर बैठते हैं।
हिन्दू शास्त्र के अनुसार, प्रकृति-पृथ्वी और नदियों को भी माॅं का दर्जा दिया गया है जो जगत-जननी माॅं दुर्गा का ही रूप है। ऐसे में पूजा करने के दौरान हम यह क्यों भूल जाते हैं कि प्रकृति में प्रदूषण कर क्या हमारी पूजा फलीभूत होगी!
यहां इन बातों से हमारा ध्येय आपका ध्यान उन पूजन सामग्री की ओर करना है जो आज बाजार में केवल कमाई की दृष्टि से बेची जा रही हैं। इनका आम जीवन और पूजा में कोई उपयोग नहीं हो पाता है। बड़े-बड़े मंदिरों में और आपके घरों में भी यह बाद में सिर्फ एक कचरे की तरह पड़ा रहता है। इस बारे में कई सामाजिक संस्थान, एंजिओ, सोशल वर्कर ऐसा न करने की लोगों से गुहार लगा रहे हैं।


उपयोगी हो श्रृंगार सामग्री
सौभाग्य की कामना के लिए चढ़ाई जाने वाली श्रृंगार सामग्री चढ़ाते वक्त आप यह ध्यान रखें कि क्या आप स्वयं ऐसी वस्तुओं का उपयोग करती हैं। बाजार में श्रृंगार सामान के नाम पर मिलने वाले छोटे-छोटे किटों में प्लास्टिक की छोटी कंघी, चूड़ी, दर्पण, मंगलसूत्र, कपड़ा इतना छोटा और ऐसे खराब सामानों से बना होता है जो न तो मंदिर के काम आता है और न ही आप इसे उपयोग में ला सकती हैं। कई धार्मिक चैनलों, सभाओं और कथाओं में भी धर्म गुरुओं के द्वारा इसका उल्लेख किया जा चुका है। धर्म गुरुओं ने भी ऐसे सामानों को चढ़ाने से लोगों को मना किया है। ये सामान बाद में मंदिर समितियों द्वारा निर्माल्य में डाल दिए जाते हैं या कई जगहों पर जल में प्रवाहित किए जाते हैं। इसीलिए ऐसे श्रृंगार सामान मां दुर्गा को अर्पित करें जिसका कोई बाद में उपयोग कर सके या आप स्वयं ही उसे उपयोग में ला सकें। ताकि मां दुर्गा का आशीर्वाद हमेशा आप पर बना रहें। सस्ती कम दरों की श्रृंगार किट, चुनरी या साड़ियां जो उपयोग न लाई जा सकें, उन्हें चढ़ाने और प्रदूषण बढ़ाने से आपकी ही पूजा प्रदूषित होगी।


नौ कन्याओं को न दें ऐसी भेंट
नौ कन्याओं की पूजा के लिए भी बाजार में आज प्लास्टिक के डिब्बे, प्लेट, बोतले, थालियां, बोतलें, पतली चुनर, प्लास्टिक के हेयर बैंड, पिन्स, चूड़ियां और कम्पास बाॅक्स, सस्ते स्कैच पेन, क्रेआन्स का भंडार पड़ा हुआ है। सस्ती होने के कारण आपका ध्यान सबसे पहले इन्हीं चीजांें को बांटने पर जाता है, पर यह सभी जल्दी टूट जाती हैं और पर्यावरण प्रदूषण बढ़ाते हैं।


जंक फूड बांटकर न निभाएं औपचारिकता
आधुनिक दौर में जहां बार-बार डाॅक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट हमें बच्चों को जंक फूड से दूर रखने के लिए कह रहे हैं। हममें से कुछ हर साल यही गलती बार-बार दोहरा रहे हैं। कामकाजी होने के कारण कई महिलाओं के लिए नौ कन्या पूजन करना और भोग-प्रसाद बनाना आसान नहीं होता है। ऐसे में लोग जूस, चिप्स, चाॅकलेट पैकेटबंद फूड बच्चों को कन्या पूजा में बांट देते हैं। इसीलिए भी कि बच्चे इससे खुश होते हैं, लेकिन क्या यह सही है! इस पर आप खुद विचार कर सकती हैं।


ये भी न करें

  • कन्या पूजा के दौरान प्लास्टिक, थर्माकोल के प्लेट्स का उपयोग न कर घर की नई थालियों में या पत्तियों से बनी पत्तल का पर भोजन परोसें।
  • मंदिर के आस-पास कपड़े में बंधे नारियल और श्रृंगंार सामान खरीदने से बचें, जो चढ़ाना है घर से तैयार कर ले जाएं। मंदिर पर यदि चढ़ाने न दिया जा रहा हो तो इन्हें घर पर उपयोग लाएं। मंदिर प्रांगण पर न छोड़ें।
  • भगवान के चित्रों वाले चंदन, धूप, अगरबत्ती, माचिस, चुनरी, झंडे, शीशपट्टी की खरीदारी करने से बचें।
    इनमें से कई चीजों का रिसाइकल करना या विसर्जन करना कठिन होता है, इससे ईश्वर का अपमान होता है। समझदारी के साथ अपनी पूजा को सार्थक बनाएं, क्योंकि त्योहार की समाप्ति के बाद में यह नदियों में बेतरतिब फेंकी जाती है और इसके बाद जो होता है यह आप और हम सभी जानते हैं।

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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