न्यूज डेस्क। न्याय और कर्म के देवता शनिदेव का जन्म भी शनिवार की अमावस्या को हुआ था। माना जाता है कि शनि अमावस्या के दिन शनि देव का कृपा जातकों पर विशेष रूप से बनी रहती है। इस दिन शनि देव प्राणियों के कष्टों को कम उनके जीवन को सकारात्मक बनाते हैं।
इस बार सूर्य ग्रहण और शनि अमावस्या एक ही दिन पड़ रहा है। इस अमावस्या में श्राद्ध, दान-पुण्य और पितरों का तर्पण करना शुभ माना जाता है। चैत्र मास की पहली अमावस्या होने के कारण भी यह काफी विशेष होती है, इस दिन शनि देव कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे।
सूर्य ग्रहण में तर्पण करना अशुभ माना जाता है। ऐसे में यदि आप असमंजस में है कि शनि अमावस्या के दिन किस तरह से पूजा-पाठ एवं श्राद्ध तर्पण करें, तो हम आपको यहां शुभ मुहूर्त बता रहे हैं।
शनि अमावस्या के दिन यानि 29 मार्च को सूर्य ग्रहण का सूतक दोपहर 2 बजकर 20 मिनट में आरंभ होगा और शाम 6 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगा। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा, लेकिन शास्त्रीय रीतियों के अनुसार, सूतक काल में पूजा-पाठ एवं तर्पण करने से बचें। ग्रहण के दौरान जाप व ध्यान करें।

  • बाल व नाखून न काटें।
  • नुकीली चीजों का उपयोग करने से बचें।
  • किसी से छल-कपट कर कमाई न करें।
  • बड़े-बुजर्गों को अपमानित करने से बचें।
  • घर के भोजन व जल में तुलसी दल डालकर रखें।
  • गर्भवती स्त्रियां घर से बाहर निकलने से बचें।
    सूतक समाप्ती पर यह करें
  • घर पर गंगा जल का छिड़काव करें।
  • शनि अमवास्या के दिन कुत्तों को ,खाना खिलाएं। उनके साथ गलत व्यवहार न करें।
  • काले कुत्तों को भोजन देने से विशेष कृपा बनेगी।
  • पीपल वृ़क्ष का पूजन करें। सरसों तेल से दीप जलाएं।
  • दान-पुण्य आदि करें।

शनि देव को है प्रिय
शनि देव का प्रिय भोग काली उड़द की खिचड़ी, मीठी पूड़ी, काले तिल की मिठाई या लड्डू, गुलाब जामुन आदि हैं। सरसों का तेल, काले चने, काल कपड़े, शमी का पौधा भी शनि देव का अति प्रिय है। इसके अलावा सबसे विशेष है कर्म की प्रधानता, जो जातक कर्म प्रधान होता है उस पर शनि देव की कृपा हमेशा बनी रहती है।

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *