न्यूज डेस्क। होलिका दहन की पूजा पूरे भारत में धूमधाम से मनाई जाती है। ब्रज की गलियों और काशी में तो पिछले एक हफ्ते से होली का अनुराग छाया हुआ है। इस वर्ष भद्रा के साये और धुलेंडी यानि होली के दिन चंद्र ग्रहण ने सभी को होली को लेकर असमंजस की स्थिति में डाल रखा है। आइए, जानें कि ऐसी परिस्थतियों किन सावधानियों के साथ हमें शास्त्रों का पालन कर होली मनानी चाहिए।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलिका दहन का मुहूर्त 13 मार्च गुरुवार रात्रि 11 बजकर 26 मिनट से शुरू होकर 14 मार्च की रात्रि 12 बजकर 30 मिनट तक है। इसके साथ ही होली के दिन 14 मार्च को चंद्रग्रहण है जो कि सुबह 9 बजकर 29 मिनट से होकर 3 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। होलिका के दिन भद्रा का साया है जो सुबह 10 बजे से शुरू होकर रात्रि 11 बजकर 26 मिनट तक रहेगा और इसी के बाद ही होलिका दहन का मुहूर्त आरंभ होगा। इसलिए होलिका दहन और होली के दिन शास्त्रीय मुहूर्त ध्यान रखकर आप होली पूजा करें और जीवन को सुखमय बनाएं।


पूजन सामग्री
थाली, गुलाल, बड़कल या पांच गोबर के कंडे, जौ की बाली, बताशे की माला, गुड, आटा, हल्दी, चावल, लौंग और काली मिर्च के जोड़े, घी का दिया, जल का लोटा, कलावा, फूल, दुर्वा।


ऐसे करें होलिका दहन की पूजा –
– भूमि का शुद्धिकरण करें।
– अगर आप घर पर होलिका पूजा कर रही हैं तो होलिका दहन वाली भूमि पर आटे की रंगोली डालें या स्वास्तिक चिन्ह बनाएं।
– इसके बाद दहन की लकड़ियां और गोबर के कंडे इस भूमि पर लगाएं।
– बड़कल की माला पिरोएं एवं होला और होली को स्थापित करें।
– जल, फूल और दुर्वा चढ़ाएं।
– बतासे, अक्षत, गुड़, चढ़ाएं। लौंग के जोड़े चढ़ाएं। गेहूं की बाली 5,7,11 चढ़ा सकते हैं।
– घर पर छोटा बच्चा हो तो उसके बेहतर स्वास्थ्य की कामना के लिए बतासे या मेवों की माला चढाएं। नारियल चढ़ाएं।
– होली पर कूपर जलाने का विशेष महत्व होता है इससे आने वाले साल के रोगों को दूर करने की कामना की जाती है।
– होली माता को गुलाल लगाकर, जल लेकर 7 परिक्रमा करें।
– होलिका पर कलावा लपेटकर प्रार्थना करें। इष्ट देव से कामना करें कि होली अच्छी जाए।
– इसके बाद घर के पुरुषों द्वारा दीपक देकर होलिका दहन की प्रक्रिया पूरी करें।

चौक-चौराहा या आंगन जहां होलिका दहन हुआ है वहां से कुछ गर्म राख लेकर आएं।
-घर पहुंचकर चैखट के दोनों तरफ स्वास्तिक बनाएं। थोड़ा गुलाल डालें।
– इसके बाद घर में सभी को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दें। बड़ों का आशीर्वाद लें।
– गेहूं की भूनी बाली या आपके क्षेत्र की जो भी फसल जिसका आप भोग लगाते हैं चाहे वह घर के पकवान, पापड़ हो जिसे आपने होलिका में समर्पित किया हो। प्रसाद के रूप में सभी को वितरित करें।

चंद्र गहण में ऐसे मनाएं होली
– होली के दिन भारत में चंद्रग्रहण दिखाई नहीं देगा इसलिए यहां सूतक मान्य नहीं है, लेकिन शास्त्रीय नियमों का पालन जरूरी है।
– दोस्तों पड़ोसियों और घर-परिवार के साथ आप होली खेल सकते हैं, लेकिन इस दौरान आप पूजा-पाठ न करें।
– भगवान को गुलाल व भोग होली सूतक काल हटने के बाद अर्पित करें।
-घर पर होली के पकवान पहले से बन गए हों तो सभी पर तुलसी दल डाल कर रखें।
– घर पर पानी की कमी हो और ग्रहण के बाद इसे फेंकना मुश्किल हो तो इस पर भी तुलसी दल डाल दें।
– धारदार वस्तुओं का इस्तेमाल न करें। खाना पकाने से बचें।
– ग्रहण के बाद गंगाजल से स्नान करें। पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
– गर्भवती महिलाएं बाहन न निकलें।
– भजन, जाप इत्यादि करें।

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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