उज्जैन (एजेंसी)। मध्य-प्रदेश की राज्य सरकार को सिंहस्थ कुंभ के लिए बसाई जाने वाली हाईटेक कुंभ सिटी प्लान में शहर वासियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। लैंडपुलिंग के तहत अधिग्रहण की जाने वाली जमीनों के किसान राज्य सरकार से नाखुश नजर आ रहे हैं। दरअसल कुंभ के लिए स्थाई सिटी बसाए जाने का प्लान है जिसके तहत हर 12 वर्ष में कुंभ के लिए बसाई जाने वाली सिटी में होने वाले खर्च को बचाया जा सके।
राज्य सरकार और उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा सिंहस्थ मेला क्षेत्र की 2378 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। इसी का सैकड़ों किसान विरोध कर रहे हैं।
2028 में लगने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के लिए सरकार ने करीब 2000 करोड़ रुपए की कुंभ नगरी बसाने की योजना बनाई है।इस योजना के तहत शिप्रा नदी के किनारे स्थित रोड, मुरलीपुरा और मंगलनाथ मंदिर के आसपास के क्षेत्र की करीब 15 हजार बीघा से ज्यादा जमीन कुंभ क्षेत्र के अंतर्गत ली जाएगी।
सीएम मोहन यादव की टीम ने सिंहस्थ मेला क्षेत्र को विकसित करने के लिए अस्थायी निर्माण कि बजाए स्थाई निर्माण की योजना बनाई है। इसके लिए 1806 किसानों की जमीन की लेंड पुलिंग की गई है, जिस पर कुंभ सिटी बनाई जाएगी।
राज्य सरकार की लैंड पूलिंग स्कीम में 50 प्रतिशत भूमि किसान से ली जाएगी। जिसमें 25 प्रतिशत भूमि में शेड, सेंटर लाइटिंग, स्टॉर्म वाटर ड्रेन, सीवर और वाटर लाइन सहित अंडरग्राउंड विद्युत लाइन निर्माण होगा. 5 प्रतिशत भूमि पर पार्क श्बच्चों के लिए झूले और स्लाइड, आम पब्लिक के लिए वॉकिंग पाथवे, ओपन जिमश् विकसित किये जाएगा. 5 प्रतिशत भूमि पर आम-जन की सुविधा हेतु पार्किंग, जन सुविधा केंद्र, हॉस्पिटल, स्कूल, विद्युत सब-स्टेशन आदि निर्माण किया जाएगा जो सिंहस्थ मेले के लिहाज से उपयोगी साबित होगा.
सिंहस्थ किसान संघर्ष समिति का कहना है कि हम लोग सिंहस्थ के लिए कुंभ 2016 के तर्ज पर जमीन देने के लिए तैयार हैं, लेकिन लैंड पुलिंग स्कीम में नहीं। इससे हमारी आधी जमीन ले ली जाएगी और मुआवजे के तौर पर कुछ नहीं दिया जाएगा। हम सभी बेघर हो जाएंगे। सिंहस्थ क्षेत्र में किसानों को घर, पशुओं के लिए बाड़े और फसल रखने तक नहीं दिया जा रहा। स्थाई निर्माण के बाद हमारी जमीन के साथ क्या किया जाएगा इसके बारे स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *