डेस्क न्यूज| शिव पुराण में महाशिवरात्रि व्रत की कथा की महिमा बताई गई है। शिव पुराण के अनुसार, जाने-अनजाने में भी जो मनुष्य महाशिवरात्रि व्रत कर लेता है वह शिव कृपा का भागी बन जाता है।
महाशिवरात्रि व्रत कथा
चित्रभानु नामक शिकार कर अपने परिवार का पालन-पोषण किया करता था। एक दिन उसका परिवार भूख से काफी व्याकुल था। अपने परिवार के पोषण के लिए भोजन की तलाश में वह जंगल में काफी दूर निकल आया। अंधेरा होने पर उसने जंगल में ही रात बिताने का फैसला किया और एक पेड़ पर चढ़ गया।
उस पेड़ के नीचे शिवलिंग था जो बेलपत्र के पत्तों से ढका हुआ था। शिकारी को इस बारे में जानकारी नहीं थी। पेड़ पर चढ़ते समय उसके हाथों से कुछ बेलपत्र और उसकी टहनियां टूटकर शिवलिंग में जा गिरीं, और जाने-अनजाने में भूख-प्यास से व्याकुल शिकारी से महाशिवरात्रि के व्रत का पालन हो गया।
शिकार की तलाश में बैठे शिकारी को अचानक रात के समय एक हिरणी के तलाब किनारे पानी पीने की आवाज सुनाई दी। शिकारी ने जैसे ही अपना धनुष हिरणी पर शिकार करने के लिए ताना, हिरणी बोली, ‘ हे शिकारी मैं गर्भवती हूं। शीघ्र ही प्रसव करुंगी। ऐसे में तुमसे एक साथ दो जीवों की हत्या हो जाएगी। मैं बच्चे को जन्म देकर तुरंत तुम्हारे सामना आ जाउंगी। तब मुझे मार लेना।’ शिकारी को हिरणी पर दया आ गई और उसने हिरणी को जाने दिया।
हिरणी की राह देखते-देखते शिकारी पेड़ से बेलपत्र तोड़-तोड़ कर नीचे फेंकता रहा। सुबह से शाम तक उसने कई सारी बेलपत्तियां तोड़ कर शिवलिंग पर चढ़ा दी थीं। जाने-अनजाने ही सही ऐसा करके उसने महाशिवरात्रि के चारों पहर की पूजा सम्पन्न कर ली थी। इस तरह सुबह हो गई। उपवास, रात्रि जागरण, और शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से शिकारी के महाशिवरात्रि की पूजा पूर्ण हो गई थी। थोड़ी देर बार हिरणी अपने बच्चों को लेकर शिकारी के पास पहुंची। शिकारी को उन सभी को देखकर बहुत गिलानी हुई और उसने पूरे परिवार को जीवनदान दे दिया। अनजाने में शिवरात्रि व्रत का पालन करने की वजह से शिकारी को मोक्ष की प्राप्ति हुई। जब उसकी मृत्यु हुई तो यमदूत उसके जीव लेने पहुंचे तब शिवगणों ने उन्हें वापस भेज दिया और उसे शिवलोक ले गए। भगवान शिवजी की कृपा से चित्रभानु को अगले जन्म में भी अपने पिछले जन्म की बातें याद रहीं। शिवरात्रि के महत्व को जानकर उसने अगले जन्म में भी उसका पालन किया।
शिवपुराण के अनुसार अनजाने में किए गए व्रत का बहुत महत्व बताया गया है। अर्थात बिना किसी कामना के किए गए पूजन का फल शीघ्र मिलता है। भगवान शिव सीधे और सरल देवता है। उन्हें प्रसन्न करने के लिए किसी दिखावे की जरूरत नहीं है।

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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