मालवीय नगर हादसे के बाद भी सोया है प्रशासन

By Digital Desk | Updated: June 5, 2026, 15:38 IST


🚨 मुख्य बिंदु (Key Highlights)

  • बड़ा खुलासा: दिल्ली-NCR में 60% से अधिक व्यावसायिक इमारतें बिना वैध फायर NOC के संचालित।
  • ताज़ा हादसा: मालवीय नगर के होटल (Flourish Stay B&B) में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत [03 जून 2026]।
  • सरकारी सुस्ती: हादसे के बाद कागजों पर शुरू हुआ चेकिंग अभियान, जमीनी हकीकत जस की तस।
  • अवैध निर्माण: मात्र 6 कमरों की अनुमति पर चल रहे थे 25 अवैध कमरे, बिल्डिंग में नहीं था कोई फायर रेजिस्टेंस।

मालवीय नगर अग्निकांड ने खोली पोल: 5 साल में भी नहीं जागा प्रशासन

नई दिल्ली: दिल्ली और एनसीआर (NCR) में नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाकर मासूम जिंदगियों से खिलवाड़ करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मालवीय नगर के एक अवैध होटल में 21 लोगों की दर्दनाक मौत ने यह साबित कर दिया है कि प्रशासन ने पिछली घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया है। राजधानी में बिना फायर रेजिस्टेंस, बिना वैध लाइसेंस और सिंगल एग्जिट (एकमात्र निकास द्वार) वाले अवैध होटल और कोचिंग सेंटर धड़ल्ले से मौत का जाल बुन रहे हैं।

1. सिर्फ 6 कमरों की अनुमति, धड़ल्ले से चला रहे थे 25 कमरे

पुलिस और दिल्ली फायर सर्विस (DFS) की शुरुआती जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:

  •  होटल के ग्राउंड फ्लोर पर अवैध रूप से रेस्टोरेंट और बेसमेंट में किचन चलाया जा रहा था, जबकि उनके पास केवल ‘टी एंड स्नैक्स स्टॉल’ का पुराना लाइसेंस था। 
  •  दिल्ली पर्यटन विभाग की ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ (B&B) योजना के तहत इस इमारत को केवल 6 कमरों की अनुमति थी, लेकिन मालिक अवैध रूप से 25 कमरे बनाकर होटल चला रहा था। 
  • खिड़कियां सील, गेट बंद: मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) ए.के. मलिक के अनुसार, इमारत की खिड़कियों को स्थाई रूप से शीशों से सील किया गया था। आग लगते ही सेंसर वाले ऑटोमैटिक दरवाजे फेल हो गए और पूरी बिल्डिंग गैस चैंबर बन गई, जिससे लोग दम घुटने से मर गए। 

2. दिल्ली में कितने अवैध होटल? आंकड़ा जान रह जाएंगे दंग

दिल्ली फायर सर्विस और नगर निगम (MCD) के सूत्रों के अनुसार, दिल्ली के पहाड़गंज, करोल बाग, मालवीय नगर (हौज रानी) और महिपालपुर जैसे इलाकों में हजारों की संख्या में अवैध गेस्ट हाउस और होटल चल रहे है

📊 विशेष डेटा: दिल्ली-NCR के पिछले 5 वर्षों के बड़े अग्निकांड

दिल्ली फायर सर्विस के ‘कॉल समरी’ आंकड़ों के मुताबिक, केवल जनवरी से मई के बीच ही दिल्ली में 10,103 फायर कॉल आईं और 44 से अधिक मौतें हुईं। पिछले 5 वर्षों का आंकड़ा रूह कंपा देने वाला है:

तारीख और वर्षघटना का स्थानहादसे का शिकारमुख्य कारण और प्रशासनिक लापरवाही
03 जून, 2026मालवीय नगर (Flourish Stay B&B)21 लोगों की मौतसिर्फ 6 कमरों की अनुमति पर 25 अवैध कमरे, सील खिड़कियां और सिर्फ 1 एग्जिट गेट।
18 मार्च, 2026पालम (आवासीय इमारत)9 लोगों की मौतघनी आबादी और संकरी गलियों के कारण फायर टेंडर का देरी से पहुंचना।
26 मई, 2024विवेक विहार (बेबी केयर अस्पताल)7 नवजात बच्चों की मौतअस्पताल के पास वैध लाइसेंस नहीं था, अवैध ऑक्सीजन सिलेंडर जमा थे।
27 जुलाई, 2024ओल्ड राजेंद्र नगर (Rau’s IAS)3 छात्रों की मौतबेसमेंट का उपयोग अवैध रूप से बिना ड्रेनेज व्यवस्था के लाइब्रेरी के तौर पर किया जा रहा था।
15 जून, 2023मुखर्जी नगर (कोचिंग सेंटर)61 से ज्यादा छात्र घायलबहुमंजिला इमारत में आग लगने पर छात्रों को तारों के सहारे खिड़कियों से कूदना पड़ा।
13 मई, 2022मुंडका (कमर्शियल बिल्डिंग)27 लोगों की मौतबिना फायर एनओसी के अवैध रूप से संचालित फैक्ट्री, सीढ़ियों का ब्लॉक होना।

🏢 हाई-राइज सोसाइटियों में भी बड़ा खतरा: सिर्फ ‘सजावटी’ हैं फायर सिस्टम

यह लापरवाही सिर्फ तंग गलियों के होटलों या कोचिंग सेंटरों तक सीमित नहीं है। नोएडा, गुरुग्राम और दिल्ली की बड़ी-बड़ी रिहायशी सोसाइटियों (High-Rise Societies) में भी नियमों की सरेआम अनदेखी हो रही है:

  1. पानी रहित पाइप: सोसाइटियों में लगे फायर हाइड्रेंट और पाइप केवल दिखावे के लिए हैं, आपातकाल में इनमें पानी का दबाव शून्य मिलता है।
  2. ताले में बंद इमरजेंसी गेट: सुरक्षा के नाम पर अधिकांश सोसाइटियों की छतों के दरवाजे और आपातकालीन सीढ़ियों (Emergency Exits) पर हमेशा ताला लटका रहता है।
  3. बेसमेंट का कमर्शियल इस्तेमाल: पार्किंग के लिए स्वीकृत बेसमेंट में अवैध रूप से दुकानें, गोदाम और दफ्तर चलाए जा रहे हैं।

📜 क्या कहते हैं नियम? नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) के कड़े दिशा-निर्देश

नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) के पार्ट-4 और दिल्ली फायर सर्विस एक्ट के तहत किसी भी होटल, कोचिंग या कमर्शियल बिल्डिंग में इन नियमों का पालन अनिवार्य है:

  • दो अलग निकास (Two Exits): हर कमर्शियल इमारत में प्रवेश और निकास के लिए कम से कम दो चौड़ी सीढ़ियां होनी चाहिए।
  • फायर रेजिस्टेंस सामग्री: सीढ़ियों और दरवाजों के निर्माण में अग्नि-अवरोधक (Fire-Resistant) सामग्री का उपयोग अनिवार्य है। खिड़कियां स्थायी रूप से सील नहीं की जा सकतीं।
  • ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर और अलार्म: हर मंजिल पर स्मोक डिटेक्टर और पानी छिड़कने वाले ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम चालू हालत में होने चाहिए।
  • फायर ऑडिट: हर 6 महीने में फायर विभाग से एनओसी (NOC) का रिन्यूअल और स्टाफ की मॉक ड्रिल जरूरी है।

💬 जनता का सवाल: हादसों के बाद ही क्यों जागता है सिस्टम?

मालवीय नगर अग्निकांड के बाद दिल्ली सरकार ने एक महीने का विशेष जांच अभियान शुरू कर अवैध गेस्ट हाउसों को सील करने का आदेश तो दिया है, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह केवल कुछ दिनों की दिखावे की कार्रवाई है। जब तक भ्रष्ट अधिकारियों और अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक दिल्ली की इमारतें इसी तरह “जीते-जागते श्मशान” में बदलती रहेंगी।



By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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