न्यूज डेस्क। एक जुआरी और चोर जो शिवरात्रि की रात्रि शिवालय में चोरी करने पहुंचा था कैसे धनाधिपति कुबेर बन बैठा क्या आप जानते हैं।
जी हां ऐसी है शिवरात्रि की महिमा। भगवान शिव ने गुणनिधि नामक एक ब्राह्म्ण जो चोरी करने की आदत की वजह से पिता द्वारा घर से निकाला गया था। भूख प्यास से तड़पते गुणनिधि ने जब देखा कि शिवरात्रि के मौके पर शिवालय में पूजा में नवैध चढ़ाए जा रहे हैं तो चोरी से नवैध खाने के लिए वह रात्रि में मंदिर में जा छुपा। अंधेरा होने की वजह से उसने मंदिर में अपनी धोती को फाड़कर उसका दीपक जला दिया और मंदिर के नवैध खा लिए और बस इतने में ही भोलेनाथ खुश हो गए क्योंकि कहीं न कहीं गुणनिधि ने उस पूरे दिन शिवरात्रि का व्रत कर लिया था और दीपक जलाकर भगवान शिव की पूजा की और रात्रि जागरण कर लिया।
यही नहीं उनका और एक जन्म कलिंग के राजा के रूप में भी हुआ था जहां शिवभक्ति में रमे कुबेर देव ने अपने राज्य के हर शिवालय में दीप जलाने का आदेश दिया था।
़़ऋषि विश्रवा के यहां जब उनका जन्म हुआ तो उन्होंने भगवान शिव की घोर तपस्या की और भगवान ने यन्हें यक्षों का स्वामी और धनाधिपति कुबेर बनने का आशीर्वाद दिया। कुबेर ने कैलाश के समीप ही अपनी नगरी अल्कापुरी बसाई और भगवान शिव के पड़ोसी बन गए। शास्त्रों में यह पौराणिक नगरी हिमालय पर्वत पर स्थित मानी जाती है। वर्तमान में यह उत्तराखंड के बद्रीनाथ के पास स्थित अल्कापुरी ग्लेशियर है जहां से ही अलकनंदा नदी निकलती है।
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