न्यूज डेस्क। बहुला चतुर्थी पूरे भारत में मनाया जाने वाला त्योहार है। सावन महीने के कृष्ण पक्ष के 4थे दिन पड़ने वाले इस व्रत की अलग ही महिमा है। छत्तीसगढ़ में काफी संख्या में महिलाएं अपनी संतान की रक्षा के लिए इस व्रत को करती आई हैं। इस व्रत को बोल चौथ के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन किसान समुदाय, विशेष रूप से महिलाएं गाय की पूजा करती हैं। इस दिन बछड़े और गाय की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन गायों की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है वहीं संतान दीर्घायु होती है।
इस दिन गाय के दूध या दूध से उत्पादों का उपभोग नहीं नहीं किया जाता है। कई स्थानों में भगवान कृष्ण की गाय के साथ मूर्तियां या चित्र बनाकर पूजा की जाती है। किसान गायों को रखने वाले स्थानों की साफ-सफाई करने के साथ गायों और बछड़ों को नहलाकर उनकी साज-सज्जा कर पूजा करते हैं।
छत्तीसगढ़ में गाय-बछड़े और शेर की मिट्टी से मूर्तियां बनाकर माताएं इसकी पूजा करती थी। कथा पाठ करती हैं और जौं से बने लड्डू का भोग लगाती हैं। इस दिन गाय के दूध का सेवन वर्जित माना गया है।

व्रत कथा
बहुला नाम की एक गाय थी जो अपने बछड़े भोजन देने के लिए घर वापस लौट रही थी कि जंगल में उसका शेर से सामना हो गया। मृत्यु को सामने देख अपने बच्चे का ख्याल करते हुए बहुला ने शेर से कहा कि उसे अपने बछड़े को दूध पिलाना है। इसलिए वह उसे एक बार घर जाने दे इसके बाद वह वापस आ जाएगी और तब शेर उसे खा सकता है। शेर ने उसकी बातों पर विश्वास कर उसे मुक्त कर दिया और उसकी प्रतीक्षा की ।
बहुला अपने बछड़े को दूध पिलाने के बाद जब वापस जंगल की ओर जाती रहती है तो अपने बच्चे से शेर की घटना बतलाती है। उसका बछड़ा रोने लगता है। उसके रूदन की आवाज सुनकर बहुला के मालिक पंडित और पंडिताइन जब यह जानते हैं तो बहुला के पीछे-पीछे जंगल की ओर निकल पड़ते हैं। बहुला को वापस आता देख शेर हैरान हो जाता है। जब बहुला शेर को खुद को अपना भोजन बनाने के लिए कहती है तो पीछे से आया उसका बछड़ा और पंडित-पंडिताइन भी शेर के समक्ष आकर खुद को उन्हें शेर को भोजन बनाने और बहुला को छोड़ देने आग्रह करते हैं, लेकिन बहुला उन सभी को मुक्त कर खुद को, शेर को आहार बनाने को कहती है। एक मां के बच्चे के प्रति प्रेम और बछड़े के मां के प्रति वहीं पंडित-पंडिताइन के अपनी गाय और बछड़े के प्रति प्रेम को देख शेर अभिभूत हो जाता है और सभी को मुक्त कर देता हैं।

बहुला चौथ पर क्या है वर्जित
इस दिन गाय का दूध उपयोग नहीं लाया जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लोगों को चाकू से कटा हुआ या गेहूं से बना कुछ भी खाद्य पदार्थ उपभोग करने की अनुमति नहीं होती है।
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