आइची-नागोया। एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का स्वर्णिम और दमदार प्रदर्शन लगातार जारी है। रविवार का दिन भारत के खेल इतिहास के लिए बेहद खास रहा, जहां हमारे एथलीटों ने रफ्तार, जज्बे और ताकत का बेजोड़ प्रदर्शन करते हुए कुल 7 पदक (4 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज) अपने नाम किए। इनमें से अकेले एथलेटिक्स (ट्रैक एंड फील्ड) में 5 पदक और स्क्वैश कोर्ट में 2 ऐतिहासिक सिल्वर पदक भारत की झोली में आए हैं।

इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत पदक तालिका में 4 गोल्ड, 16 सिल्वर और 17 ब्रॉन्ज के साथ कुल 37 पदकों के आंकड़े पर पहुंच गया है।

🏃‍♂️ एथलेटिक्स: 56 साल का सूखा खत्म, चमके भारतीय सितारे

ट्रैक एंड फील्ड पर भारतीय खिलाड़ियों ने हर मुकाबले में प्रतिद्वंदियों को कड़ी टक्कर दी:

  • सर्वेश कुशारे (हाई जंप): पुरुषों की ऊंची कूद (High Jump) स्पर्धा में सर्वेश ने कमाल कर दिया। उन्होंने देश के लिए सिल्वर मेडलजीता, जो एशियन गेम्स में इस स्पर्धा में 56 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत का पहला पदक है।
  • एंसी सोजन (लॉन्ग जंप): महिलाओं की लंबी कूद में एंसी ने 6.53 मीटर की शानदार छलांग लगाकर सिल्वर मेडल पर कब्जा किया। वे महज 2 सेंटीमीटर से गोल्ड जीतने से चूकीं।
  • पारुल चौधरी (स्टीपलचेज): महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज रेस में पारुल ने अपनी रफ्तार का लोहा मनवाया और देश को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया।
  • तेजस्विन शंकर और हरिता भद्रा: तेजस्विन ने डेकाथलन में और हरिता ने महिलाओं की 200 मीटर स्प्रिंट रेस में देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीते।

🎾 स्क्वैश: 18 साल की अनाहत ने रचा इतिहास

स्क्वैश कोर्ट से भारत के लिए दो सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलताएं आईं:

  • अनाहत सिंह: 18 साल की युवा सनसनी अनाहत सिंह एशियन गेम्स के इतिहास में महिला एकल (Women’s Singles) में सिल्वर मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं।
  • अभय सिंह: पुरुषों के सिंगल्स फाइनल में अभय सिंह ने मलेशिया के डिफेंडिंग चैंपियन को कड़ी टक्कर देते हुए देश के लिए एक और सिल्वर मेडल पक्का किया।

🥊 बॉक्सिंग: तीन और पदक पक्के!

मैदान के बाहर रिंग से भी अच्छी खबर आ रही है। मुक्केबाज परवीन हुड्डा, अंकुश पंघाल और नरेंदर बेरवाल ने अपने-अपने भार वर्ग के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है, जिससे भारत के तीन और पदक पूरी तरह सुरक्षित हो गए हैं।

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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