अयोध्या। जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही अयोध्या के राम मंदिर में न केवल श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है, बल्कि दान और चढ़ावे के मामले में भी देश के सभी बड़े मंदिरों के रिकॉर्ड टूट रहे हैं. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जारी ताजा वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, रामलला के खजाने में अब तक अरबों रुपयों की राशि जमा हो चुकी है, लेकिन इस अपार चढ़ावे के साथ ही मंदिर के दानपात्र से जुड़े ₹7 करोड़ के कथित के मुद्दे पर इस समय देश की राजनीति और धार्मिक गलियारों में भारी घमासान मचा हुआ है.
ब तक कितना आया चढ़ावा
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, राम मंदिर को अब तक ₹3,000 करोड़ से अधिक का कुल दान प्राप्त हो चुका है.वार्षिक आय (थ्ल् 2025-26)रू अकेले वित्त वर्ष 2025-26 में मंदिर को ₹220.81 करोड़ की आय हुई है.दानपात्र (हुंडी) से कमाईरू मंदिर परिसर में रखे दानपात्रों से सालभर में ₹54.79 करोड़ नकद मिले हैं. यानी हर महीने औसतन करीब ₹5 करोड़ सिर्फ दानपात्रों से आ रहे हैं.ऑनलाइन और काउंटर दान
दान काउंटरों से ₹18.88 करोड़ और डिजिटल ऑनलाइन माध्यमों से ₹8.33 करोड़ प्राप्त हुए हैं.बैंक ब्याजरू ट्रस्ट के विभिन्न खातों में जमा राशि पर करीब ₹138 करोड़ का ब्याज भी आय में शामिल है.बैंक बैलेंसरू वर्तमान में ट्रस्ट के भारतीय स्टेट बैंक खातों में लगभग ₹1,940 करोड़ जमा हैं.


दान देने में राजस्थान आगे
ट्रस्ट द्वारा चलाए गए श्समर्पण निधि अभियानश् और संकलित डेटा के अनुसाररूराजस्थान पहले नंबर पररू राम मंदिर निर्माण के शुरुआती राष्ट्रव्यापी अभियान में राजस्थान से सबसे अधिक दान मिला था. अकेले राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और चित्तौड़गढ़ जैसे क्षेत्रों से ₹500 करोड़ से ज्यादा की राशि एकत्रित हुई थी.महाराष्ट्र दूसरे नंबर पररू मुंबई और महाराष्ट्र के बड़े कॉर्पोरेट घरानों, फिल्म जगत और आम नागरिकों ने खुलकर दान दिया, जिससे यह राज्य दूसरे स्थान पर रहा.गुजरात और उत्तर प्रदेशरू गुजरात के हीरा व्यापारियों और उत्तर प्रदेश के आम श्रद्धालुओं की ओर से भी अरबों रुपयों का गुप्त और प्रत्यक्ष दान दिया गया है. इसके अलावा, मंदिर को विदेशों से भी करोड़ों रुपये का चंदा मिला है.

. इस चढ़ावे और पैसे का उपयोग कहाँ हो रहा है?
ट्रस्ट के अनुसार, चढ़ावे की राशि का उपयोग बेहद व्यवस्थित ढंग से निम्नलिखित कार्यों में किया जा रहा हैरूमंदिर निर्माण की लागतरू राम मंदिर परिसर के संपूर्ण निर्माण कार्य पर अब तक लगभग ₹1,800 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं.रखरखाव और वेतनरू मंदिर की प्रतिदिन की सुरक्षा, बिजली, साफ-सफाई, पुजारियों और 40 से अधिक सेवादारों-कर्मचारियों का वेतन.अन्नक्षेत्र और सेवाएंरू रोजाना अयोध्या आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त भोजन (अन्नक्षेत्र), चिकित्सा शिविर और ठहरने की व्यवस्था.आभूषणों का प्रबंधनरू भक्तों द्वारा चढ़ाए गए 25 किलो से अधिक सोने-चांदी के आभूषणों का मूल्यांकन और सुरक्षित रख-रखाव सरकार की मिंट संस्था की देखरेख में किया जा रहा है.

क्या है दानपात्र विवाद?
हाल ही में यह आरोप सामने आया है कि दानपात्र के पैसों की गिनती करने वाली टीम के कुछ कर्मचारियों ने रुपयों की हेरफेर (गबन) की है, जिसमें लगभग ₹7 करोड़ के गायब होने का दावा विपक्ष कर रहा है


.किसने क्या कहा?
अखिलेश यादव (सपा प्रमुख) का आरोपरू समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए कहा, ‘राम मंदिर के दानपात्र से करोड़ों की चोरी की खबरें आ रही हैं. इस महाघोटाले पर सरकार की चुप्पी संदिग्ध है. देश की शीर्ष अदालत (न्यायालय) को इस मामले का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए.


चंपत राय (राम मंदिर ट्रस्ट महासचिव) का पलटवार
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मंदिर में पाई-पाई का हिसाब पारदर्शी है. आंतरिक ऑडिट लगातार होता है. यदि कोई संदिग्ध कर्मचारी पाया जाता है तो विभागीय कार्रवाई होती है, इसे राजनीतिक रंग देना गलत है.

जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य का बयान
इस विवाद पर प्रसिद्ध कथावाचक स्वामी रामभद्राचार्य ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा, ष्अखिलेश यादव ठीक नहीं कर रहे हैं. मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूँ कि राम मंदिर ट्रस्ट में एक रुपये की भी चोरी नहीं हो रही है.ष्काशी सुमेरु पीठ के शंकराचार्य का रुखरू काशी सुमेरु पीठ के शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, ष्राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है. बिना किसी ठोस प्रमाण के इतने पवित्र स्थल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाना केवल जनता को बरगलाने की राजनीति है. हालांकि, अगर कोई संदेह है तो निष्पक्ष जांच से सच सामने आ जाएगा.ष्

ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या राम मंदिर दानपात्र विवाद पर बेहद कड़ा और तीखा रुख अपनाया है। उन्होंने विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों का समर्थन करते हुए मंदिर प्रबंधन और ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर सीधे सवाल खड़े किए हैं।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बातचीत में

दानपात्र से पैसे गायब होने के आरोपों पर तंज कसते हुए शंकराचार्य ने कहा कि जब व्यवस्था गलत हाथों में सौंप दी जाएगी, तो इस तरह के परिणाम आना स्वाभाविक हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर का प्रबंधन धार्मिक आचार्यों के बजाय एक विशेष संगठन और राजनीतिक लोगों को सौंपना ही इन समस्याओं की मुख्य जड़ है।

पूरी पारदर्शिता का दावा
ट्रस्ट का कहना है कि दानपात्रों की गिनती रोजाना 40 से अधिक कर्मचारियों की टीम, सीसीटीवी कैमरों और वॉयस रिकॉर्डिंग की सख्त निगरानी में दो शिफ्टों में की जाती है. इसके बाद हर छह महीने में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स द्वारा इसका कड़ा ऑडिट किया जाता है, जिससे किसी भी प्रकार के बड़े घोटाले की गुंजाइश नहीं है. फिलहाल यह मुद्दा कोर्ट, कचहरी और राजनीति के केंद्र में बना हुआ है.

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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