New Delhi| पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर आज संसद के दोनों सदनों में भारी घमासान मचा हुआ है। विपक्ष के चौतरफा हंगामे के बीच सरकार ने लोकसभा में नया ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पेश कर दिया है। इसके बावजूद, विपक्षी सांसद सड़कों पर छात्रों के खिलाफ हुए पुलिस बल प्रयोग को लेकर गृह मंत्री से जवाबदेही मांग रहे हैं।

संसद में मचे इस सियासी बवाल की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

1. नए एंटी-पेपर लीक बिल में बेहद कड़े प्रावधान

संसद में पेश किए गए नए संशोधन विधेयक में पेपर लीक माफियाओं पर नकेल कसने के लिए बेहद सख्त सजा तय की गई है:

  • 10 साल तक की जेल: पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली करने वाले दोषियों को 5 से 10 साल की कैद।
  • ₹10 करोड़ तक का जुर्माना: संगठित अपराध (Organised Crimes) से जुड़े नेटवर्कों पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना।
  • फास्ट-ट्रैक कोर्ट: हर राज्य में विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे ताकि 3 महीने के भीतर मुकदमों का फैसला हो सके।
  • 2 महीने की समयसीमा: पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच को 2 महीने के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा।
  • कोचिंग संस्थानों पर गाज: धांधली में संलिप्त पाए जाने वाले कोचिंग संस्थानों की संपत्ति कुर्क की जाएगी।

2. क्यों अड़ा है विपक्ष और क्यों रुकी कार्यवाही?

  • शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: भारी दबाव और छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शनों के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
  • लाठीचार्ज और पैलेट गन पर बवाल: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने 20 जुलाई को दिल्ली में संसद मार्च कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया।
  • गृह मंत्री से जवाब की मांग: विपक्ष लगातार गृह मंत्री अमित शाह से इस पुलिस कार्रवाई पर जवाबदेही और सदन में विस्तृत बयान की मांग कर रहा है।
  • सदन स्थगित: भारी नारेबाजी और हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा है।

3. सरकार और विपक्ष का रुख

  • सरकार का पक्ष: केंद्रीय मंत्रियों का कहना है कि सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर है और कड़ा कानून लाकर व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित बनाना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कड़े कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई है।
  • विपक्ष का पक्ष: विपक्षी नेताओं का कहना है कि सिर्फ कानून बना देने से संकट हल नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में बैठे जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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