नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों का गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है। कंपनियों ने सोचा था कि एआई आने से उनका खर्च कम होगा, लेकिन साल 2026 में इसके उलट एआई ही कंपनियों का बजट फूंकने वाला सबसे बड़ा विलेन बन गया है।
🔴 बजट ब्लास्ट: इंसानी सैलरी से महंगा हुआ AI
दिग्गज टेक कंपनियों का एआई कंप्यूटिंग और सर्वर का खर्च (Compute Cost) अब उनके इंसानी कर्मचारियों की कुल सैलरी से भी आगे निकल चुका है। उबर जैसी बड़ी कंपनियों ने शुरुआती 4 महीनों में ही सालभर का एआई बजट खत्म कर दिया, वहीं माइक्रोसॉफ्ट को खर्च पर लगाम लगाने के लिए अपने इंजीनियर्स के ‘क्लाउड कोड’ लाइसेंस तक रोकने पड़े हैं। गूगल, मेटा और अमेजन जैसी कंपनियां इस साल डेटा सेंटर्स और एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 50 लाख करोड़ रुपये ($600 बिलियन) खर्च कर रही हैं, जिसने उनके प्रॉफिट मार्जिन पर भारी दबाव बना दिया है।
📉 जॉब मार्केट पर असर: फंडिंग शिफ्ट और छंटनी
इस बजट संकट का सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ा है। साल 2026 के शुरुआती पांच महीनों में ही 1.42 लाख से अधिक टेक कर्मचारियों को निकाला जा चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि कंपनियां घाटे के कारण नहीं, बल्कि एआई के लिए पैसा जुटाने (Funding Shift) के लिए छंटनी कर रही हैं। कोडिंग, कस्टमर सपोर्ट, कंटेंट राइटिंग और डेटा एनालिसिस जैसे मिड-लेवल रोल्स को एआई एजेंट्स से तेज़ी से बदला जा रहा है।
🚀 आगे का प्लान: ‘AI-First’ और फ्रेशर्स पर दांव
नुकसान के बावजूद कंपनियां पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। मेटा और सिस्को जैसी कंपनियां खुद को ‘एआई-फर्स्ट’ मॉडल में बदल रही हैं। वहीं कॉग्निजेंट जैसी आईटी कंपनियां महंगे मिड-लेवल कर्मचारियों को हटाकर भारी संख्या में फ्रेशर्स को हायर कर रही हैं, ताकि उन्हें एआई टूल्स सिखाकर कम लागत में सीनियर लेवल का काम लिया जा सके।
निष्कर्ष: साफ है कि एआई आपकी नौकरी सीधे नहीं छीनेगा, लेकिन एआई का इस्तेमाल करने वाला प्रोफेशनल आपकी जगह ज़रूर ले लेगा।
