नई दिल्ली:
अदालतों में बरसों तक खिंचने वाले मुकदमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने देश के सभी हाई कोर्ट्स को आदेश दिया है कि बहस और सुनवाई पूरी होने के बाद अधिकतम 3 महीने (90 दिन) के भीतर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा।
अदालत ने साफ किया कि ‘न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर है।’ अब जज सुरक्षित रखे गए फैसलों को लंबे समय तक लटकाकर नहीं रख सकेंगे। यदि किसी मामले में 3 महीने के अंदर निर्णय नहीं आता है, तो मुख्य न्यायाधीश को दखल देना होगा। इस ऐतिहासिक कदम से आम जनता को समय पर न्याय मिलेगा और तारीखों का अंतहीन सिलसिला हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
