News DesK| चेटीचंड (Chetri Chand) सिंधी समाज का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है, जो सिंधी नववर्ष की शुरुआत और उनके इष्टदेव भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। 

  • तिथि: वर्ष 2026 में चेटीचंड 20 मार्च, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
  • शुभ मुहूर्त: चैत्र शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 21 मार्च 2026 को सुबह 02:33 बजे समाप्त होगी। मुख्य उत्सव आमतौर पर तब मनाया जाता है जब दूज का चाँद दिखाई देता है। 
  • इसे ‘चेटीचंड’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह दो शब्दों से मिलकर बना है: ‘चेत’ और ‘चंड’। 
  • चेत (Chet): यह हिंदू कैलेंडर के पहले महीने ‘चैत्र’ का सिंधी नाम है।
  • चंड (Chand): इसका अर्थ है ‘चाँद’
  • सिंधी परंपरा के अनुसार, यह त्योहार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि (दूज) को मनाया जाता है, जब चंद्रमा पहली बार दिखाई देता है। चूँकि यह चैत्र के चाँद के दर्शन का दिन है, इसलिए इसे ‘चेटीचंड’ कहा जाता है।

झूलेलाल महोत्सव का इतिहास

  • वरुणावतार: भगवान झूलेलाल को जल के देवता वरुण देव का अवतार माना जाता है। उन्हें उडेरोलाल, लाल साईं और जिंदा पीर के नाम से भी जाना जाता है।
  • प्राकट्य की कथा: 10वीं शताब्दी में सिंध के अत्याचारी शासक मिरकशाह से सिंधी हिंदुओं की रक्षा के लिए उनका जन्म नसरपुर में हुआ था।
  • शांति का संदेश: उन्होंने हिंदू और मुस्लिम दोनों को एकता और भाईचारे का पाठ पढ़ाया, जिसके कारण दोनों समुदायों में उनके प्रति गहरी श्रद्धा है। 

ताज़ा अपडेट और आयोजन (News Update)

  • 13-दिवसीय महोत्सव: पूज्य झूलेलाल जयंती समारोह समिति के अनुसार, इस वर्ष कई स्थानों पर 13 से 25 मार्च तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
  • प्रमुख कार्यक्रम: महोत्सव की शुरुआत धर्मध्वज पूजन के साथ होगी। इसके बाद प्रभात फेरी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सिंधी व्यंजन प्रतियोगिताएं और भजन संध्याएं आयोजित की जाएंगी।
  • बहराणा साहिब: श्रद्धालु ‘बहराणा साहिब’ (ज्योति और प्रसादम युक्त थाल) की शोभायात्रा निकालते हैं और इसे जल स्रोतों में विसर्जित करते हैं।
  • चालीहा साहिब: कई श्रद्धालु इस पर्व से पहले 40 दिनों का कठिन उपवास (चालीहा) भी रखते हैं।

भिलाई में चेटीचंड (भगवान झूलेलाल जयंती) का उत्सव सिंधी समाज द्वारा बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। वर्ष 

2026 में चेटीचंड 20 मार्च (शुक्रवार) को मनाया जाएगा।

भिलाई में मुख्य आयोजन स्थल (Expected) 

भिलाई का सिंधी समाज आमतौर पर इन स्थानों पर एकत्रित होता है:

  • नेहरू नगर सिंधी पंचायत: यहाँ मुख्य शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
  • कैंप क्षेत्र (Camp Area): भिलाई के कैंप क्षेत्रों में स्थित झूलेलाल मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और ‘बहराणा साहिब’ का आयोजन किया जाता है।
  • सिविक सेंटर (Civic Center): यहाँ अक्सर बड़े मेले (जैसे हाल ही में ‘भिलाई मड़ई’) आयोजित होते हैं, और चेटीचंड के अवसर पर भी यहाँ सामुदायिक कार्यक्रम देखे जा सकते हैं। 

चेटीचंड महोत्सव के प्रमुख आकर्षण

  1. बहराणा साहिब शोभायात्रा: श्रद्धालु एक सजाए हुए कलश (बहराणा साहिब) के साथ जुलूस निकालते हैं, जिसे बाद में जल में विसर्जित किया जाता है।
  2. छेज (Chhej): यह सिंधी लोक नृत्य है जो डांडिया की तरह होता है, इसे शोभायात्रा के दौरान युवाओं द्वारा विशेष रूप से किया जाता है।
  3. आम लंगर (प्रसादम): मंदिरों और सामुदायिक केंद्रों पर ‘तहिरी’ (मीठे चावल) और ‘छोले’ का वितरण किया जाता है।
  4. सांस्कृतिक संध्या: स्थानीय सिंधी कलाकारों द्वारा भजन और गीत प्रस्तुत किए जाते हैं। 

#sindhi

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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