कवर्धा। कवर्धा जिले के भोरमदेव मंदिर में स्थित है एक ऐसा कुंड जहां का पानी रातों रात गायब हो जाता है और दूसरे दिन पूरी तरह से वापस आ जाता है। इस कुंड के इस रहस्य की वजह से इसे लोग पाताल कुंड या लुप्त कुंड कहते हैं। स्थानीय लोगों की मान्यताओं के अनुसार, इस कुंड का रास्ता सीधे पाताल लोक से जुड़ा हुआ है। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यहां पुराने समय में ऋषिमुनि इस कुंड में स्नान के लिए आया करते थे। बैगा आदिवासी आज भी इस कुंड की पूजा करते हैं उनका मानना है कि इस कुंड में कई औषधिय गुण विद्यमान हंै जो बीमारियों को दूर करते हैं।
वैज्ञानिक तथ्यों की माने तो भोरमदेव का इलाका चूना पत्थरों के पहाड़ों वाला है। विज्ञान के अनुसार, जमीन के नीचे साइफन सिस्टम या नैचुरल एक्वीफर लगे होने की वजह से भी पानी अचानक जमीन के अंदर चला जाता है और दबाव की वजह से थोड़ी में फिर से वापस जमीन पर आ जाता है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर परिसर के पास एक ऐसा जल स्रोत या गहरा कुंड है जिसे ‘पाताल कुंड’ कहा जाता है। लोक कथाओं के अनुसार इसका संपर्क सीधे पाताल लोक से है और इसका जल स्तर कभी कम नहीं होता।
मंदिर के गर्भगृह या आसपास के हिस्सों में कुछ ऐसे स्थान हैं जहाँ जमीन को थपथपाने पर खोखली आवाज़ (नगाड़े जैसी) आती है। इसे “लुप्त कुंड” या “गुप्त मार्ग” माना जाता है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में राजाओं ने यहाँ से सुरक्षित निकलने के लिए गुप्त सुरंगें बनवाई थीं जो अब लुप्त हो चुकी हैं।
मान्यताएं और तथ्य कुछ भी हों पर रहस्यमयी यह कुंड लोगों के लिए काफी रोचक है।
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