न्यूज डेस्क। छत्तीसगढ़ी में आपको कोई डोकरा, मुसवा, करिया जैसी ठिठोलियों से संबोधित करे तो बुरा मत मान लीजिएगा। यह लहजा है छत्तीसगढ़ की ठिठोलियों से भरे प्यार का जो गांव देहात के लोग अपने प्रिय को प्यार से संबोधित कर बुलाते हैं। यह छत्तीसगढ़ का वह अनूठा अंदाज़ है जहाँ शब्दों की कड़वाहट के पीछे भी प्यार छिपा होता है। ग्रामीण अंचलों में यह ‘गाली’ नहीं, बल्कि अपनों के बीच की ‘ठिठोली’ है।”
जैसे किसी चंचल व्यक्ति को या सांवले को यहां मुसवा कह दिया जाता है। मुसवा यानि चूहा होता है। यहां के लोग ज्यादातर मुसवा मंडल, कस रे मुसवा! जैसे वाक्यों से संबोधित करते हैं। वहीं दूसरा वर्ड है डोकरा जो बुर्जुगों के लिए होता है, करिया सांवले लोगों के लिए। इस शब्द को उपयोग करना छत्तीसगढ़ी गोंठ में मजाक और ठिठोली मानी जाती है। यह प्यार की भाषा है। अपनेपन की बोली है।
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