नई दिल्ली| जस्टिस यशवंत वर्मा के घर हाल ही में होली के दिन आग लग गई थी। इस दौरान उनके घर पर मिले 15 करोड़ कैश के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डी के उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी है। यह रिपोर्ट कचीफ जस्टिस संजीव खन्ना को सौंपी गई है। रिपोर्ट को इंटरनल इन्क्वायरी रिपोर्ट कहा जा रहा है। गौरतलब है कि होली की रात करीब 11.35 बजे जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में आग लग गई थी| वह दिल्ली से बाहर थे| उनके परिवार वालों ने आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड को फोन लगाया| आग बुझाने बड़ी संख्या में पुलिस भी पहुंची थी कि इस दौरान वहां कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी मिली। जस्टिस के घर का एक पूरा कमरा नोटों से भरा था ।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने जस्टिस यशवंत वर्मा को वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने का फरमान सुना दिया| इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जस्टिस यशवंत वर्मा की इलाहाबाद हाईकोर्ट वापसी के खिलाफ है| इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने कहा है कि किसी सामान्य कर्मचारी के घर पर 15 लाख रुपये मिलते हैं, उसे जेल भेजा जाता है और जज के घर पर 15 करोड़ रुपये मिले हैं तो उन्हें घर वापसी का ईनाम दिया जा रहा है|
तिवारी ने कहा कि हमारी मांग यह है कि उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट नहीं भेजा जाए,किसी तरह की जांच की अब कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि अगर जस्टिस वर्मा कोई एक्सप्लेनेशन देते हैं तो उससे पब्लिक फेथ रिस्टोर नहीं होगा| पब्लिक फेथ पूरी तरह डैमेज हो चुका है| अगर पब्लिक फेथ हट गई इस न्यायपालिका से तो यहां माफियाओं का राज हो जाएगा।
जस्टिस यशवंत वर्मा इलाहाबाद आएं तो कोर्ट में काम नहीं होगा| बार एसोसिएशन का कहना है कि न्यायपालिका ही जब भ्रष्टाचारी जज को सजा नहीं देगी तो कौन देगा| ट्रांसफर कोई सजा नहीं होती| यह बेहद संगीन आरोप है| जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलना चाहिए|
