यदि आपके शहर में भी बारिश या बादलों के कारण चांद नहीं दिख रहा है, तो आप इन 4 शास्त्र सम्मत विधियों में से किसी भी एक विधि से व्रत खोल सकती हैं:
- विधि 1: शिव जी के मस्तक के चंद्रमा के दर्शन (सर्वश्रेष्ठ विकल्प):
घर के मंदिर में भगवान शिव (चंद्रमौलेश्वर) की ऐसी तस्वीर या मूर्ति के सामने दीपक जलाएं, जिनके मस्तक पर बाल-चंद्रमा विराजमान हों। उस चंद्रमा का ध्यान करें, छलनी से दर्शन करें, अक्षत-रोली चढ़ाएं और जल का अर्घ्य देकर पति के हाथ से पानी पी लें। - विधि 2: चावल से प्रतीकात्मक चांद बनाना (प्रतीक पूजा):
एक साफ थाली या चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और साबुत चावल (अक्षत) की मदद से चंद्रमा की आकृति (आधा चांद) बना लें। इसे साक्षात चंद्रदेव मानकर धूप-दीप दिखाएं, छलनी से इसके दर्शन करें, अर्घ्य दें और व्रत खोलें। - विधि 3: चांदी के सिक्के या आभूषण का पूजन:
ज्योतिष में चांदी को चंद्रमा का कारक धातु माना गया है। एक साफ थाली में चांदी का सिक्के रखें, उसे गंगाजल से शुद्ध करें। रोली-चंदन लगाकर उसकी पूजा करें और उसे ही चंद्र स्वरूप मानकर अर्घ्य अर्पित करें। - विधि 4: पंचांग के समय पर मानसिक अर्घ्य (दिशा पूजन):
अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार चंद्रोदय के सटीक समय का इंतजार करें। ठीक उसी समय आकाश में चंद्रमा की निश्चित दिशा (पूर्व-उत्तर दिशा) की ओर मुख करके खड़े हो जाएं। मन में “ॐ सोमाय नमः” का जाप करते हुए बादलों की ओट में छिपे चंद्रदेव को मानसिक रूप से जल अर्पित (अर्घ्य) करें।
विशेष ध्यान दें: शास्त्रों के अनुसार, श्रद्धा ही सर्वोपरि है। मौसम की इस आपातकालीन स्थिति में यूपी और छत्तीसगढ़ की सुहागिन महिलाएं बिना किसी मानसिक तनाव के उपरोक्त विधियों से अपनी पूजा संपन्न कर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं।
🔸 उत्तर प्रदेश (UP) में चंद्रोदय का समय:
- लखनऊ: रात 8:06 बजे (कुछ स्थानीय पंचांग के अनुसार रोहिणी नक्षत्र के प्रभाव से 8:20 बजे तक पूर्ण दृश्यता)
- कानपुर: रात 8:05 बजे
- नोएडा / गाजियाबाद: रात 8:16 बजे
- वाराणसी / प्रयागराज: रात 8:00 से 8:05 बजे के बीच [1, 2]
🔹 छत्तीसगढ़ में चंद्रोदय का समय:
- रायपुर: रात 8:18 बजे
- बिलासपुर / कोरबा: रात 8:06 बजे
- जगदलपुर: रात 8:17 से 8:22 बजे के बीच
- बलरामपुर (सबसे पहले): रात 8:02 बजे [1, 2, 3]
चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण यदि इन तय समयों पर आसमान में घने बादल या बारिश की स्थिति रहती है, तो सुहागिनें बिल्कुल चिंता न करें। पंचांग के इस सटीक समय के होते ही आप पूर्व-उत्तर दिशा की ओर मुख करके मानसिक अर्घ्य दे सकती हैं या घर में शिव जी के मस्तक के चंद्रमा का ध्यान कर अपना व्रत पूर्ण कर सकती हैं। [1, 2]
