एजेंसी /दुबई। विमान में जानलेवा संकट के बीच यात्रियों की सुरक्षा के लिए संघर्ष करने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सम्मानित किया है। फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में हुए गंभीर घटनाक्रम के दौरान साहस और कर्तव्यनिष्ठा दिखाने के लिए उन्हें और विमान के अन्य क्रू सदस्यों को ‘ऑर्डर ऑफ जायद द्वितीय’ के प्रथम श्रेणी सम्मान से नवाजा गया।

यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने कैप्टन मच्छार से मुलाकात की और उन्हें गले लगाकर उनके साहस की सराहना की। सम्मान दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने प्रदान किया। समारोह में दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम भी मौजूद थे।यह घटना 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 में हुई थी। उड़ान के दौरान कॉकपिट में सह-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थिति इतनी खतरनाक हो गई कि विमान की सुरक्षा पर गंभीर संकट पैदा हो गया।

‘द नेशनल’ की रिपोर्ट के अनुसार, हमले के बावजूद कैप्टन मच्छार ने हिम्मत नहीं छोड़ी। गंभीर चोटों और धुंधली पड़ती नजर के बीच उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश जारी रखी। आखिरकार वह दरवाजा खोलने में सफल रहे, जिससे दूसरे क्रू सदस्यों और यात्रियों को अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू करने का मौका मिला।हजारों फीट नीचे आया विमानघटना के दौरान विमान की ऊंचाई में तेजी से गिरावट आई।

रिपोर्टों के मुताबिक, विमान कुछ ही समय में हजारों फीट नीचे आ गया और आपातकालीन स्थिति पैदा हो गई। संकट के बीच विमान में मौजूद अन्य पायलटों, क्रू सदस्यों और यात्रियों ने मिलकर स्थिति को संभालने में मदद की। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक की ओर मोड़ा गया, जहां उसकी आपातकालीन लैंडिंग कराई गई। विमान सुरक्षित उतर गया और उसमें सवार यात्रियों तथा क्रू सदस्यों की जान बच गई।यूएई नेतृत्व ने कैप्टन मच्छार और उनके सहयोगियों की सराहना करते हुए कहा कि संकट के समय यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना और अपनी जिम्मेदारी निभाना उनके साहस तथा पेशेवर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कैप्टन मच्छार की बहादुरी ने विमानन सुरक्षा में क्रू की भूमिका को एक बार फिर सामने ला दिया है। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने जिस तरह संकट से निपटने का प्रयास किया, वह विमान में मौजूद अन्य लोगों के लिए बचाव का रास्ता खोलने में अहम साबित हुआ।

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