उज्जैन (मध्य प्रदेश): हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पूरे देश में नागपंचमी का त्योहार बेहद श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसा चमत्कारी मंदिर भी है, जिसके पट साल में केवल एक बार नागपंचमी के दिन सिर्फ 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं?

यह मंदिर है मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित सुप्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष भाग पर स्थापित नागचंद्रेश्वर मंदिर। इस मंदिर और नागपंचमी से जुड़ी कुछ ऐसी अनसुनी और दुर्लभ कहानियां हैं, जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं।
1. अनोखी मूर्ति: जहां शिव ‘नंदी’ नहीं, ‘नाग’ के आसन पर विराजमान हैं
आमतौर पर भगवान शिव की मूर्तियां नंदी बैल के साथ या ध्यान मुद्रा में होती हैं। लेकिन नागचंद्रेश्वर मंदिर में स्थापित 11वीं शताब्दी की अद्भुत प्रतिमा में भगवान शिव और माता पार्वती दस मुखी सर्पराज तक्षक के सिंहासन पर विराजमान हैं। पूरी दुनिया में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां शिवजी सर्प शैय्या पर बैठे हैं (ऐसी मुद्रा आमतौर पर भगवान विष्णु की होती है)।
2. पौराणिक रहस्य: क्यों साल में सिर्फ एक बार खुलते हैं पट?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सर्पराज तक्षक ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की थी। भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर उन्हें अमरत्व का वरदान दिया और अपने पास रख लिया। माना जाता है कि तक्षक नाग स्वयं इस मंदिर में वास करते हैं और उनकी एकाग्रता भंग न हो, इसलिए मंदिर को पूरा साल बंद रखा जाता है। केवल नागपंचमी के दिन आम भक्तों को उनके दर्शन की अनुमति होती है ताकि लोग कालसर्प दोष से मुक्ति पा सकें।
3. वैज्ञानिक और पारिस्थितिक (Ecological) सच: क्यों वर्जित है ज़मीन खोदना?
धार्मिक कहानियों से अलग, नागपंचमी के पीछे एक गहरा वैज्ञानिक और पर्यावरणीय कारण भी है जो बहुत कम लोग जानते हैं। नागपंचमी हमेशा मानसून (सावन) के मौसम में आती है। इस समय भारी बारिश के कारण सांपों के बिलों में पानी भर जाता है और वे बाहर आ जाते हैं।
शास्त्रों में नागपंचमी के दिन खेतों में हल चलाना या ज़मीन खोदना पूरी तरह प्रतिबंधित माना गया है। इसके पीछे का असली कारण यह है कि ज़मीन खोदने से बाहर निकले हुए बेकसूर सांपों या उनके अंडों को नुकसान न पहुंचे। प्राचीन काल से ही सांपों को ‘क्षेत्रपाल’ (फसलों का रक्षक) माना गया है क्योंकि वे उन चूहों को खाते हैं जो अनाज नष्ट करते हैं।
4. भाई-बहन के अनोखे रिश्ते की लोककथा
उत्तर भारत में जहां इसे नाग देवता की पूजा से जोड़ा जाता है, वहीं दक्षिण भारत और कुछ लोककथाओं में नागपंचमी भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। कहानी के अनुसार, एक लड़की के कहने पर उसका भाई पूजा के लिए केतकी के फूल लाने गया था, जहां उसे सांप ने काट लिया। लड़की ने सच्चे मन से नाग देवता की पूजा की, जिससे प्रसन्न होकर नागराज ने उसके भाई को दोबारा जीवित कर दिया। इसी वजह से आज भी कई क्षेत्रों में महिलाएं अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए नाग देवता की पूजा करती हैं।
