रायपुर / दुर्ग: छत्तीसगढ़ के पारंपरिक तिहार कमरछठ (हलषष्ठी) [2 सितंबर 2026] बर राज्य के बजार मन म रौनक छागे हे। इस तिहार म माता मन अपन नोनी-बाबू मन के खुशहाली बर उपवास रखथें। व्रत म सिर्फ अइसन अनाज अउ भाजी के उपयोग करे जाथे, जेमा हल (नांगर) न चले हो। एही कारण हे कि बिना हल चलाए उगने वाला पसर चावल (Red Wild Rice) के मांग बजार म अचानक बहुत बढ़गे हे।
📍 कहाँ मिलथे पसर चावल के बजार?
कमरछठ के दउरान छत्तीसगढ़ के हर छोटे-बड़े शहर अउ गांव के बजार म पसर चावल मिलथे। रायपुर के गोलबाजार, दुर्ग के इतवारी बाजार, बिलासपुर, राजनांदगांव, अउ रायगढ़ के स्थानीय हाट-बाजार म एकर विशेष काउंटर सजथे। आम दिनों म ये चावल आसानी से नहीं मिले, पर तिहार के 4-5 दिन पहले ये प्रमुख रूप से बजार म उपलब्ध होथे।
🚜 कहाँ होथे एकर खेती अउ कइसे बनथे?
पसर चावल के कौनों व्यवस्थित खेती (Commercial Farming) नहीं करे जाय। [1]
- प्राकृतिक रूप से विकास: ये चावल प्राकृतिक रूप से तालाबों, डबरी, अउ दलदली जमीनों के किनारा अपने-आप उगथे। [1, 2]
- हल मुक्त प्रक्रिया: एला उगाए बर किसान मन ला नांगर (हल) चलाए के जरूरत नहीं पड़े। [1]
- कठिन मेहनत: कुरुख या आदिवासी समुदाय अउ ग्रामीण अंचल के किसान मन पानी म घुस के एक-एक कर एकर कटीली बालियों (धान) ला हाथ से इकट्ठा करथें। ओकर बाद एला सुखा के, मूसल या पारंपरिक तरीका से कूट के चावल निकाले जाथे。 [1]
💰 किसान कतका कमा लेथें? (सालाना कमाई अउ गणित)
पसर चावल के सीजन सिर्फ कमरछठ के आसपास ही सबसे जादा रहिथे।
- बजार भाव: आम दिनों म धान ₹30-₹40 किलो बिकथे, पर पसर चावल तिहार के दउरान ₹200 से ₹250 प्रति किलो तक बिकथे। [1]
- सीजनल कमाई: एक छोटे स्तर के ग्रामीण परिवार या किसान तिहार के 10-15 दिनों के मेहनत म 50 किलो से 2 क्विंटल तक चावल इकट्ठा कर लेथें। इससे ओ मन ला ₹15,000 से ₹40,000 तक के अतिरिक्त नगद आय मिल जाथे।
- सालाना कमाई: चूंकि ये सिर्फ सीजनल (तिहारी) आय ए, त एकर सालाना बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं होवय। पर स्थानीय व्यापारी जो एला स्टोर करथें, ओ मन सालाना लाखों के टर्नओवर करथें।
🌍 क्या विदेशों म घलो हे पसर की डिमांड?
जी हां, विदेशों म घलो एकर मांग बढ़तरी म हे!
आजकल विदेशों म अउ बड़े मेट्रो शहरों म लोगन मन केमिकल-मुक्त अउ ऑर्गेनिक फूड (Organic Food) के पीछे जावत हें। पसर चावल पूर्णतः प्राकृतिक अउ ऑर्गेनिक होथे, जेकर से एला ‘Satvic Red Wild Rice’ के नाम से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स (जैसे Amazon) अउ विदेशों म घलो एक्सपोर्ट करे जावत हे। एनआरआई (Non-Resident Indians) अउ छत्तीसगढ़ी समाज के लोगन मन जो अमेरिका, लंदन या दुबई म रहिथें, ओ मन घलो तिहार मनाए बर ऑनलाइन माध्यम से अइसन पारंपरिक चावल ला भारी कीमत म मंगवाथें
- बिलासपुर अउ जांजगीर-चांपा: जांजगीर अउ बिलासपुर के मैदानी इलाका म पानी के जमाव वाले खेत अउ दलदली जमीन म ये जंगली धान (Wild Rice) प्राकृतिक रूप से बहुत जादा उगथे। [1, 2]
- बालोद अउ राजनांदगांव: कमरछठ (हलषष्ठी) के समय दुर्ग, भिलाई अउ राजनांदगांव के मुख्य बजार मन म जो पसर चावल आथे, ओकर बड़े हिस्सा बालोद अउ मानपुर-मोहला के ग्रामीण क्षेत्रों से कलेक्ट करे जाथे।
- गंगरेल अउ बस्तर के तराई इलाका: बस्तर अउ कांकेर के कतिपय अंदरूनी क्षेत्र अउ धमतरी के गंगरेल बांध के आसपास के डूबान इलाका म घलो आदिवासी भाई-बहिनी मन एला भारी मात्रा म इकट्ठा करथें। [1]
💡 रायपुर अउ दुर्ग-भिलाई हावय सबसे बड़े बजार
भले ही ये चावल धमतरी, महासमुंद, जांजगीर अउ बालोद के ग्रामीण इलाका से कलेक्ट करे जाथे, पर एकर सबसे बड़े बजार (खपत केंद्र) रायपुर (गोलबाजार) अउ दुर्ग-भिलाई के पारंपरिक बजार आय। इहाँ तिहार के 3-4 दिन पहले ये जिला मन से टनों के हिसाब से पसर चावल पहुंचथे अउ महँगे दाम म बिकथे।
