नई दिल्ली (एजेंसी)। अमेरिका में काम करने का सपना देखने वाले हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को H-1B वीजा नीति के मामले में संघीय अदालत से बड़ा झटका लगा है। एक संघीय अदालत ने नए H-1B वीजा आवेदनों पर लगाए गए 1 लाख डॉलर यानी करीब 83 लाख रुपये के अतिरिक्त शुल्क को गैरकानूनी करार दिया है।

अदालत ने कहा कि यह शुल्क अमेरिकी कानून के अनुरूप नहीं है और इसे लागू करने का स्पष्ट कानूनी अधिकार सरकार के पास नहीं था।न्यायाधीश Leo Sorokin ने अपने फैसले में कहा कि संघीय सरकार कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं से बाहर जाकर ऐसा शुल्क नहीं लगा सकती। अदालत ने इस अतिरिक्त शुल्क को निरस्त करने का आदेश दिया है। इस फैसले का सबसे अधिक असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर और तकनीकी विशेषज्ञ H-1B वीजा के माध्यम से अमेरिका में काम करते हैं।

H-1B वीजा अमेरिका का एक प्रमुख कार्य वीजा कार्यक्रम है, जिसके तहत विदेशी विशेषज्ञों को तकनीक, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में रोजगार की अनुमति दी जाती है। भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स इस वीजा श्रेणी के सबसे बड़े लाभार्थियों में गिने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इतनी बड़ी अतिरिक्त फीस लागू हो जाती, तो विदेशी प्रतिभाओं की भर्ती पर असर पड़ता और अमेरिकी कंपनियों के लिए कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करना काफी महंगा हो जाता। अदालत के इस फैसले को भारतीय पेशेवरों, वैश्विक प्रतिभाओं और अमेरिकी कंपनियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगे इस मामले में प्रशासन की अगली रणनीति क्या होगी।

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