News Desk| देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के सामने एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच के मुताबिक, इस महाघोटाले के तार सीधे तौर पर परीक्षा के इकोसिस्टम और पेपर-सेटिंग प्रक्रिया से जुड़े अंदरूनी लोगों (Insiders) से मिल रहे हैं। यानी जिन विषय विशेषज्ञों और प्रोफेसरों को बेहद गोपनीयता के साथ प्रश्नपत्र तैयार करने या मॉडरेट करने का जिम्मा मिला था, उन्होंने ही सुरक्षा घेरे को तोड़कर इसे लीक कर दिया।
जांच के मुख्य बिंदु:
- अंदरूनी नेटवर्क का पर्दाफाश: CBI की शुरुआती जांच के अनुसार, पुणे की एक बॉटनी प्रोफेसर और एक सेवानिवृत्त केमिस्ट्री प्रोफेसर, जो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की प्रश्नपत्र तैयार करने वाली गोपनीय समितियों से जुड़े थे, वे ही इस लीक के मुख्य केंद्र बिंदु बनकर उभरे हैं।
- लाखों का सौदा: पेपर बनाने और समीक्षा पैनल में शामिल इन दिग्गजों ने परीक्षा से पहले ही प्रश्न पूल से बॉटनी, जूलॉजी और केमिस्ट्री के सवालों को निकाल लिया। इसके बाद, कोचिंग सेंटर संचालकों और बिचौलियों के माध्यम से अभ्यर्थियों को लाखों रुपये में यह प्रश्नपत्र और उत्तर उत्तर पुस्तिकाएं बांटी गईं।
- सुप्रीम कोर्ट की फटकार: इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले की सुनवाई करते हुए NTA को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि जब तक इस सिस्टम में ऊपर से नीचे तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक देश के युवाओं के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ रुकने वाला नहीं है।
फिलहाल, सरकार ने सुरक्षा खामियों को स्वीकार किया है और आगामी परीक्षाओं को पूरी तरह से कम्प्यूटर बेस्ड (CBT) मोड में कराने का आश्वासन दिया है।
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