लखनऊ।
कहते हैं कि अगर दिल में कुछ कर गुजरने की चाहत हो, तो सफेद होते बाल और चेहरे की झुर्रियां महज एक गिनती बनकर रह जाती हैं। नवाबों के शहर लखनऊ के एक 71 वर्षीय बुजुर्ग ने इस बात को सच कर दिखाया है। जब इस उम्र में लोग रिटायरमेंट के बाद आराम की कुर्सी तलाशते हैं, तब ये जनाब ‘नीट 2026’ (NEET) के भारी-भरकम सिलेबस के साथ पन्ने पलट रहे हैं।
पुराना सपना, नई उड़ान
डॉक्टर बनने की उनकी यह हसरत आज की नहीं है। दशकों पहले कुछ पारिवारिक जिम्मेदारियों और मजबूरियों के चलते उनका मेडिकल कॉलेज जाने का सपना अधूरा रह गया था। लेकिन जैसा कि वे खुद कहते हैं, “सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती।” उन्होंने एक बार फिर अपनी पुरानी किताबों को झाड़ा और इस साल नीट की परीक्षा में बैठकर सबको चौंका दिया।
युवा छात्रों के लिए बने प्रेरणा
परीक्षा केंद्र पर जब वे पहुंचे, तो उनके साथ परीक्षा देने आए 18-19 साल के छात्र उन्हें देखकर दंग रह गए। कई छात्रों को लगा कि शायद वे अपने पोते-पोती को परीक्षा दिलाने आए हैं, लेकिन जब वे खुद एडमिट कार्ड लेकर अपनी सीट पर बैठे, तो पूरा हॉल उनके जज्बे का मुरीद हो गया।
उम्र सिर्फ एक नंबर है
सोशल मीडिया पर भी उनकी यह कहानी काफी चर्चा बटोर रही है। लखनऊ के इन ‘यंग ओल्ड मैन’ का मानना है कि इंसान तब तक बूढ़ा नहीं होता जब तक वह सीखना बंद नहीं करता। उनका कहना है कि अगर वे यह परीक्षा पास कर लेते हैं, तो यह न केवल उनके बचपन के सपने की जीत होगी, बल्कि उन तमाम लोगों के लिए एक मिसाल होगी जो उम्र का बहाना बनाकर अपने सपनों को दफन कर देते हैं।
अब देखना यह होगा कि नीट के कड़े कॉम्पिटिशन में यह ‘अनुभवी जोश’ क्या कमाल दिखाता है, लेकिन उन्होंने अपनी हिम्मत से यह तो साबित कर ही दिया है कि “हौसलों के तरकश में अभी भी कई तीर बाकी हैं।”
