स्ंपादकीय। नेपाल में जेन जी आंदोलन ने दो दिन के अंदर तख्ता पलट कर दिया। युवाओं ने देश भर के शहरों में ऐसा उत्पाद मचाया कि उच्च पदों पर बैठे नेताओं को जान बचा कर भागना पड़ा। बात यहां पर यह है कि क्या युवाओं के पास इतनी ताकत हो सकती है कि वह दो दिन में किसी देश का तख्ता पलट करने की हिम्मत रखें या इनके पीछे किसी विकसित देश की सोची-समझी साजिश हो सकती है। सयानों की मानें तो नाम तो चीन और अमेरिका का भी आ रहा है कि नेपाल में अस्थिरता के पीछे इनका हाथ हैं। भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया साइट के बैन से शुरू हुआ आंदोलन आखिर मांगना क्या चाहता था!
नेपाल में इस हिंसक आंदोलन की जिम्मेदारी एक हामी नेपाल नाम के समूह ने ली है। जिसने डिस्कार्ड जैसे प्लेटफार्म का उपयोग कर इस हिंसक भीड़ जुटाई।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस समूह के क्रियाकलापों में गंभीर बात यह है कि इसने युवाओं को स्कूली यूनिफार्म में आंदोलन में भाग लेने को कहा। युवा सिर्फ माध्यम रहे। एनजीओ द्वारा सब कुछ तय था कि कहां प्रदर्शन करना है और क्या करना है। किसे निशाना बनाना है। इसके लिए बकायदा ‘हाउ टू प्रोटेस्ट’ नाम से वीडियो अपलोड किया गया था। यही वजह है कि स्कूल और काॅलेज की पढ़ाई और अपनी जाॅब में उलझा रहने वाला जेन जी ने कैसे पूरे देश का तख्ता पलट दिया। इसलिए यह साफ है कि यह सोची समझी साजिश थी। जिसमें जेन जी तो सिर्फ माध्यम था, जो कठपुतली की तरह यूज हुआ है। बिल्कुल उस कहावत की तरह की कच्ची मिट्टी के घड़े को जिस सांचे में ढालों वह ढल जाता है। इन बड़ी एनजीओ और इनके आकाओं ने इसे प्रयोग किया है। बिल्कुल बांग्लादेश की तरह।
सयाने इसे भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन की बात बता रहे हैं, मगर समझिए मामला कुछ और ही है।
अब बात यहां इस चीज की कि इन छोटे देशों की सरकार को अस्थिर कर किसे फायदा होने वाला है और किसका नुकसान, तो ये आप सभी के समक्ष है। भारत के आस-पास स्थित बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के बाद भारत में भी अस्थिरता लाने की भरपूर कोशिश हो रही हैं।
इसका कुछ उदाहरण सयाने 2024 के चुनाव को बोलते हैं तो कुछ पहलगाम हमला, एसआईआर वोट चोरी के मुद्दों को भी इसका कारण गिना रहे हैं। इन सब के बाद भी भारत स्थिर है और अपनी प्रगति रेखा पर लगा हुआ है। यहां बेरोजगारी है तो स्टार्टअप भी है। युवा किसी न किसी माध्यम से अपनी जीवनशैली में व्यस्त हैं। इसलिए खाली दिमागों को शैतान का घर बनाने की कोशिशें यहां नाकाम होती जा रही हैं।
लेकिन इस बात को नाकारा भी नहीं जा सकता है कि कोशिशें भरसक हो रही हैं। इसीलिए सावधान रहना जरूरी है।
