(संपादकीय)। देश का हर एक चैनल, हर एक अखबार और सोशल मीडिया में आज पहलगाम के आतंकी हमले की ही खबरे हैं। देश आज शोक सतंप्त है। माएं रो रही हैं, बहनों का सुहाग उजड़ चुका है और पिता न्याय की गुहार लगा रहे हैं। भारतीयों का खून खौल रहा है और आंखें नम हैं। इन सबके बीच आतंकवाद की सबसे बड़ी हार यही है कि जिस कश्मीर की चाहत और कश्मीरी मुस्लिमों को बरगलाने के लिए आतंकी हमला कर रहे हैं वह भी उन्हें अब फूटी आंख पसंद नहीं कर रहे हैं।

क्योंकि कश्मीरियों को भी उनका मुखौटा समझ आ चुका है। अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और अपने परिवार के पोषण के लिए बेहतर आय की महत्वकांक्षा रखने वाले कश्मीरी अब भूखे पेट जेहादी नारे नहीं लगाएंगे। मजहब के नाम पर झूठा खूनी खेल किसी का पेट नहीं भरेगा। हां कुछ आस्तीन के सांप हैं, जो देश में रहकर ही इनकी पेट को लात मार रहे हैं, तभी तो पीक पर्यटन दिवसों में ऐसी घटना घट गई, जब कश्मीरियों की कमाई का दिन होता है। ये आस्तीन के सांप भारत के लिए जंग की तरह है, जिनसे निपटना बहुत जरूरी है। ये जंग इतना गहरा है कि इसमें कौन सच्चा और झूठा है ये भेद कर पाना बहुत मुश्किल है। इनमें दोगलो की फौज भी शामिल है जो इस आतंकी घटना का छुपा चहरा भी हो सकते है। इसके साथ बाहर जो इनके आका है उनकी तो पारी आ ही चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी में अपने भाषण में इस बात की ओर इशारा कर दिया है। देश को पूरा भरोसा है कि भारत इस मसले को जल्द ही सुलझाएगा। भारत उन मांओं और बहनों का बदला लेकर रहेगा।

साल भर पैसे बचा कर अपने पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए अपने होटलों, दुकानों को रंगरोगन कराते हैं तमाम उन नई चीजों से भरते हैं, जिसे कभी उन्होंने भी उपयोग नहीं किया है, बस इसलिए कि टूरिस्ट खुश और वापस फिर लौटकर आएं। पर्यटक दिवसों पर वह साल भर की कमाई कर सकें। कोई लोन लेता हैं, तो कोई अपने बचे-खुचे सारे पैसे लगा देता है। ताकि टूरिस्ट आए तो वह अच्छी कमाई कर सके और साल भर अपने परिवार का पेट पाल सके। लेकिन अब उनकी इस आस को इन नापाक जेहादियों की नजर लग गई। उनकी इस कमाई का जरिया बर्बाद होने का कारण कहीं ना कहीं वो ख़ुद भी है जो ऐसे लोगो का विरोध नहीं करते जो आतंक को सपोर्ट करते हैं।आज इस खबर को लिखे जाने तक एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक कश्मीर में हजारों टैक्सियां गुरुवार को आगामी दिनों के लिए जीरो बुकिंग पर थीं। होटले के कमरे पूरी तरीके से खाली हो रहे थे। अमेरिका जैसे बड़े देशों ने अपने नागरिकों को कश्मीर भ्रमण न करने की चेतावनी दे डाली है।

370 हटने के बाद से इन फूंटी आंख वालों की नजरें देख नहीं पा रही हैं, क्योंकि कश्मीर संवरने लगा है। पर्यटन जोरों पर है। जम्मू कश्मीर के पर्यटन ने राज्य की आर्थिक व्यवस्था सुधार दी। पिछले 5 सालों में राज्य की बेरोजगारी दर घटी है। 2024-25 में राज्य की विकास दर सात प्रतिशत से अधिक आंकी गई है। लोगों की प्रति व्यक्ति आय डेढ़ लाख रुपए तक पहुंच गई है जो कि 11 प्रतिशत की वृद्धि हैै। पिछले साल यहां आने वाले टूरिस्ट की संख्या 2.36 करोड़ थी।

युवाओं में रोजगार महत्वकांक्षाएं पनपने लगी हैं। पत्थर पकड़ने और पाकिस्तान के झंडे लहराने वाले हाथ अब अच्छी शिक्षा और जाॅब को महत्व देने लगे हैं। बस यहीं चीजें तो उनसे देखी न जा सकी, क्योंकि ये सब मोदी ने कर दिखाया। हां उसी मोदी ने जिसका कभी ये युवा आजादी के नारे लगा कर विरोध करते थे।

आतंकी हमले के चश्मदीदों ने कहा कि आतंकी हिन्दू और मुस्लिम की पहचान कर उन्हें मार रहे थे। जानबूझकर भारत में साम्प्रदायिकता को बढ़ाने और हिन्दू-मुस्लमानों को लड़ाने के प्रयोजन से ऐसा किया गया, लेकिन हमले की रात ही कश्मीरियों ने इस जघन्य घटना का विरोध कर आतंकियों के आकाओं के मुंह पर तमाचा मार दिया।
हाल ही में 13-14 अप्रैल को पाकिस्तानी आर्मी के जनरल मुनीर ने कहा था कि हिन्दू और मुस्लिम कभी एक नहीं हो सकते। हम हमेशा से एक नहीं दो राष्ट्र रहे हैं। हमारा मजहब, हमारे रिवाज, हमारी सोच, हमारी परंपरा सब कुछ हिन्दुओं से अलग है और कश्मीर हमारी नस है जिसे कोई भी हमसे अलग नहीं कर सकता। उन्होंन लोगों से कहा कि वह अपने बच्चों को हिन्दुओं से नफरत करना सिखाएं और पीढ़ी दर पीढ़ी यह बात उनके दिमाग में भरे कि हिन्दु-मुस्लिम कभी एक नहीं हो सकते। उनका यह बयान उनकी सोच और आतंक की साजिश का पर्दाफाश करने के लिए काफी है।

पाकिस्तान का जी इसलिए भी जल रहा था, क्योंकि भारत और सउदी अरब के बीच कई बड़ी योजनाओं का समझौता हो रहा था। इस समझौते में पर्यटन के रास्ते कश्मीर को एक नया आयाम मिलने वाला हैं। सउदी प्रिंस सलमान भारत के साथ रक्षा, सुरक्षा, प्रौद्ययोगिकी, कृषि, संस्कृति, स्वास्थ्य, पर्यटन, उर्जा हर क्षेत्र में रिश्ता मजबूत कर रहे हैं। ये मुस्मिल देशों में मिल रहा यह प्यार पाकिस्तान के गले हजम नहीं हो रहा था। पिछले कुछ दिनो पहले पाकिस्तान के 4700 पाक्स्तिानियों को प्रिंस सलमान ने उनके देश में भीख मांगने की वजह से जहाज में भरकर पाकिस्तान वापस भिजवा दिया था। ये बेइज्जती शायद पाकिस्तान को नागवार गुजरी थी।

भूखे से मरता पाकिस्तान अब प्यास से भी मरने वाला है। भारत उसकी कमर तोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। आपको बता दे कि सिंधु नदी पाकिस्तान की लाइफलाइन है। अगर इस नदी का पानी रोक दिया गया तो पाकिस्तान प्यासा मर जाएगा, वहां आकाल की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। पाकिस्तान की सभी प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं भी इसी नदी के दम पर टिकी हुई हैं। इस संधि पर कराची में 19 सितंबर 1960 को भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। जिसके तहत भारत अपनी वफादारी के साथ इस नदी का केवल 20 प्रतिशत ही उपयोग करती आई है। बाकि पूरा 80 प्रतिशत जल पाकिस्तान को जाता रहा है। अब आगे जो होने वाला वो तो पूरा विश्व भी देखेगा। तभी तो बिहार में पंचायती राज दिवस पर देश के लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कह दिया कि भारत की आत्मा पर हमला करने की साजिश की गई है। आतंक के आकाओं को उनकी कल्पना से परे जवाब मिलेगा।


सरकार के पांच बड़े फैसलों और आतंक के खिलाफ की जा रही कड़ी तैयारियों से जेहादियों को जवाब आने वाले दिनों में कैसे मिलेगा यह तो वक्त ही बताएगा। बहरहाल पूरा विश्व भारत के साथ आतंक के खिलाफ खड़ा है और भारत वैश्विक मंच पर भी इस आतंकी मुखौटे को बेनकाब करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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