प्रयागराज। महाकुंभ जब से शुरू हुआ है अनगिनत वीडियो और फोटो वायरल हो चुके हैं। इसी में एक नाम है, हर्षा रिछारिया का जो खूबसूरत साध्वी के नाम से फेमस होने के बाद शंकराचार्य और सनातन साधुओं के विरोधों कासामना करने के साथ, सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रही हैं। अब हर्षा ने महाकुंभ छोड़ने का निर्णय लिया है।
पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में बनी हर्षा ने विवादों के बाद खुद को साध्वी न कहकर शिष्या कहे जाने की अपील की थी। इसके बाद अब फिर से हर्षा लोगों की ट्रोल से परेशान हो चुकी है और उन्होंने कुंभ छोड़कर उत्तराखंड जाने का प्लान बना लिया है।
सोशल मीडिया ट्रोलरों पर भड़की हर्षा का कहना है, ‘शर्म आनी चाहिए एक लड़की जो धर्म से जुड़ने के लिए यहां आई थी, धर्म को जानने आई थी, सनातन संस्कृति को जानने यहां आई थी. आपने उसे इस लायक भी नहीं छोड़ा, जो पूरे कुंभ में रूक पाए। वो कुंभ जो हमारे जीवन में एक बार आएगा। आपने वो कुंभ एक इंसान से छीन लिया. जिसने भी ऐसा किया है, उसे पाप लगेगा।’
वायरल हर्षा ने कहा, ‘कुछ लोगों ने मुझे धर्म से जुड़ने का मौका नहीं दिया। इस कॉटेज में रहते हुए मुझे ऐसा लग रहा है कि मैंने बहुत बड़ा गुनाह कर दिया है। जबकि मेरी कोई गलती नहीं है, लेकिन फिर भी मुझे टारगेट किया जा रहा है तो मैं पहले यहां पूरे महाकुंभ में रहने आई थी, लेकिन अब मैं यहां नहीं रह पाऊंगी. 24 घंटे इस रूम को देखना पड़ रहा है, इससे तो अच्छा है कि मैं यहां से चली जाऊं।’ हर्षा को सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर जमकर ट्रोल किया जाने लगा। जिसके बाद हर्षा ने आखिरकार कुंभ से वापस जाने का ऐलान कर दिया हैं। उन्होंने कहा कि मैं अगले 3 दिन में महाकुंभ से उत्तराखंड जा रही हूं। क्योंकि बात अब मेरे गुरु तक आ गई है। मैं अपने गुरु की बेइज्जती बर्दाश्त नहीं कर सकती हूं। मैं एक्टर और एंकर रह चुकी हूं, लेकिन मुझे मॉडल के रूप में पेश किया जा रहा है, जो गलत है।
दरअसल, जब हर्षा का रथ पर बैठने वाला वीडियो सामने आया तो कई संत से लेकर अन्य लोग उन्हें ट्रोल करने लगे। हर्षा आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री कैलाशनंदगिरी जी महाराज की शिष्या हैं। वह महाकुंभ में निरंजनी अखाड़े से जुड़ी हैं। सबसे पहले ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में इस तरह की परंपरा शुरू करना पूरी तरह गलत है। यह विकृत मानसिकता का नतीजा है। महाकुंभ में चेहरे की सुंदरता नहीं, बल्कि हृदय की सुंदरता देख जाना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि जो अभी यह नहीं तय कर पाया है कि संन्यास की दीक्षा लेनी है या शादी करनी है, उसे संत महात्माओं के शाही रथ पर जगह दिया जाना उचित नहीं है। श्रद्धालु के तौर पर शामिल होती तब भी ठीक था, लेकिन भगवा कपड़े में शाही रथ पर बिठाना पूरी तरह गलत है।’
इसके बाद शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि यह बिल्कुल भी उचित नहीं है। इससे समाज में गलत संदेश फैलता है। काली सेना के प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप ने उनके आचरण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कुंभ का आयोजन ज्ञान और आध्यात्मिकता फैलाने के लिए किया जाता है। इसे मॉडलों द्वारा प्रचार कार्यक्रम के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।’
हालांकि, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने इस मुद्दे को ज्यादा तवज्जो न देते हुए कहा कि भगवा कपड़े पहनना कोई अपराध नहीं है और युवती ने निरंजनी अखाड़े के एक महामंडलेश्वर से मंत्र दीक्षा ली थीे। उन्होंने हर्षा का बचाव किया और कहा कि वह निरंजनी अखाड़े के एक महामंडलेश्वर से दीक्षा लेने आई थीं। वह एक मॉडल हैं और सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं। उन्होंने रामनामी कपड़ा पहना हुआ था। हमारी परंपरा है कि जब भी सनातन का कोई कार्यक्रम होता है, तो हमारे युवा भगवा कपड़े पहनते हैं।यह कोई अपराध नहीं है।
