गांधीनगर/अहमदाबाद: देश भर में शारदीय नवरात्रि की धूम है। जब भी नवरात्रि और गुजरात के गरबा की बात आती है, तो हमारे सामने रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान और संगीत की थाप पर झूमते भक्तों की तस्वीर आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुजरात की इस प्राचीन परंपरा के पीछे गहरा खगोलीय विज्ञान और आध्यात्मिक रहस्य छिपा है? आइए जानते हैं गरबा के मटके में मौजूद 27 छिद्रों (छेद), 27 नक्षत्रों से मां दुर्गा के संबंध और पूजा में मूंग (मगज) रखने के विशेष महत्व के बारे में। 


🌟 गरबा के मटके में क्यों होते हैं 27 छिद्र?

पारंपरिक गुजराती संस्कृति में नवरात्रि के पहले दिन मिट्टी के एक विशेष घड़े (जिसे ‘गरबो’ कहा जाता है) की स्थापना की जाती है। इस घड़े में विशेष रूप से 27 छिद्र किए जाते हैं, जिन्हें 9-9 की तीन पंक्तियों में व्यवस्थित किया जाता है। 

  • 27 नक्षत्रों का प्रतीक: सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिष के अनुसार, यह 27 छिद्र ब्रह्मांड के 27 नक्षत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। घड़े को पूरे ब्रह्मांड का प्रतीक माना गया है। 
  • 108 महामंत्र का गणित: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं। यदि हम 27 नक्षत्रों को 4 चरणों से गुणा करें (27 × 4), तो 108 का पवित्र अंक प्राप्त होता है। यही कारण है कि इस मटके के चारों ओर घूमकर गरबा नृत्य करने से भक्तों को पूरे ब्रह्मांड की प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करने जितना पुण्य फल मिलता है। 

🪔 गुजरात में क्यों की जाती है ‘गर्भ-दीप’ की पूजा?

‘गरबा’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘गर्भ’ और ‘दीप’ (गर्भदीप) से हुई है। मटके के भीतर एक दीया प्रज्वलित कर उसे स्थापित किया जाता है。 

  • सृजन शक्ति का सम्मान: मिट्टी का घड़ा मानव शरीर (जो मिट्टी से बना है) को दर्शाता है और इसके भीतर जलती लौ हमारी आत्मा (चेतना) और आद्याशक्ति मां दुर्गा की शाश्वत ज्योति का प्रतीक है। 
  • यह पूजा साक्षात् नारीत्व, उर्वरता और सृष्टि की आदि-शक्ति के गर्भ का सम्मान करने के लिए की जाती है, जहां से इस संपूर्ण जगत की उत्पत्ति हुई है। 

🟢 पूजा विधि में ‘मूंग’ (Mag) रखने का क्या है महत्व?

गुजरात में घटस्थापना और गरबा की पूजा के समय घड़े के नीचे या पूजा की थाली में साबुत हरी मूंग (गुजराती में ‘मग’) रखने का विशेष विधान है। [1]

  1. उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक: मूंग को वनस्पति जगत में शुद्धता, उन्नति और अत्यंत उपजाऊ अनाज माना जाता है। मां दुर्गा प्रकृति स्वरूपा हैं, इसलिए उन्हें हरी मूंग अर्पित कर परिवार में धन-धान्य, सौभाग्य और खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। 
  2. बुध ग्रह की शांति: ज्योतिषीय दृष्टिकोण से हरे मूंग का संबंध ‘बुध’ ग्रह से है, जो बुद्धि और व्यापार के कारक हैं। देवी की पूजा में मूंग का उपयोग करने से भक्तों को सद्बुद्धि और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

🌌 मां दुर्गा का इन 27 नक्षत्रों से संबंध

नवरात्रि की नौ रातें केवल नृत्य की नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा को साधने की रातें हैं। आकाश मंडल के सभी 27 नक्षत्र मां दुर्गा के अधीन माने गए हैं। जब भक्त गरबा दीप को केंद्र में रखकर चक्राकार गति (गोलाकार) में नृत्य करते हैं, तो वे वास्तव में समय के चक्र और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ खुद को जोड़ रहे होते हैं। छिद्रों से छनकर आने वाली रोशनी यह संदेश देती है कि मां की दिव्य शक्ति हर नक्षत्र और सृष्टि के हर कण में व्याप्त है। 

इस प्रकार, गुजरात का पारंपरिक गरबा मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि विज्ञान, खगोलशास्त्र और गहरी आस्था का एक जीवंत महापर्व है।

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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