गुरु पूर्णिमा का पावन पर्द श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है| मंदिरों, आश्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में सुबह से ही भक्तों और शिष्यों की भारी भीड़ उमड़ रही है.
56 साल बाद बना है यह दुर्लभ महायोग
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस साल की गुरु पूर्णिमा बेहद खास और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत ऊर्जावान है.
- दुर्लभ महासंयोग: इस बार 56 साल बाद बुधादित्य राजयोग और गुरु-शनि की विशेष स्थिति का एक अनोखा महासंयोग बना है.
- 100 गुना फल: इस शुभ योग में की गई गुरु पूजा, गुरु दीक्षा और मंत्र साधना का फल 100 गुना अधिक फलदायी माना जा रहा है.
- राशियों पर प्रभाव: गुरु का मिथुन राशि में गोचर और चंद्रमा का धनु-मकर में संचरण होने से कई राशियों के करियर और जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव के संकेत हैं.
प्रमुख हस्तियों ने दी शुभकामनाएं
देश की तमाम बड़ी राजनीतिक और आध्यात्मिक हस्तियों ने इस पावन अवसर पर देशवासियों को बधाई संदेश दिए हैं:
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता के नाम पत्र जारी कर कहा कि गुरु ही अज्ञानरूपी अंधकार से निकाल कर सत्य और प्रकाश का मार्ग दिखाते हैं.
- मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा इस अवसर पर पूरे प्रदेश में “महर्षि सांदीपनि गुरु पर्व” के तहत विशेष पखवाड़ा मनाया जा रहा है.
- आध्यात्मिक केंद्रों जैसे ईशा योग केंद्र में सद्गुरु की मौजूदगी में भव्य गुरु पूर्णिमा उत्सव का सीधा प्रसारण किया जा रहा है.
क्यों मनाया जाता है यह पर्व?
सावन की शुरुआत: आज गुरु पूर्णिमा के समापन के साथ ही कल से पवित्र सावन महीने की शुरुआत हो जाएगी और कांवड़ यात्राएं भी पूरी सुरक्षा व उत्साह के साथ शुरू हो रही हैं.
व्यास पूर्णिमा: हिंदू कैलेंडर के मुताबिक आषाढ़ मास की पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जिन्होंने महाभारत की रचना और वेदों का संकलन किया था.
परंपरा और महत्व: सनातन संस्कृति में गुरु को भगवान से भी ऊपर का दर्जा दिया गया है. यह दिन केवल औपचारिक आभार जताने का नहीं, बल्कि गुरु की सीख को जीवन में उतारने का संकल्प लेने का है.
