News Desk| जब मानसून अपनी चरम सीमा पर होता है, तब प्रकृति अपने बदलाव के दौर से गुजरती है। ठीक इसी तरह, मानव शरीर और मन को भी इस मौसम में विशेष देखभाल की जरूरत होती है। सनातन धर्म ने इसे ‘चातुर्मास’ के नियमों में पिरोया है। 25 जुलाई से शुरू हुए इस काल में भगवान विष्णु तो योग निद्रा में हैं, लेकिन हमारी चेतना को जगाने का समय आ गया है।

इस दौरान जीवन को संतुलित रखने के लिए इन प्रमुख नियमों का पालन करना चाहिए:

1. खान-पान में ‘डिटॉक्स’ फॉर्मूला (ऋतु अनुसार संयम)

इस चार महीने की अवधि में पाचन तंत्र धीमा हो जाता है, इसलिए हमारे ऋषियों ने वैज्ञानिक आधार पर खान-पान के सख्त नियम बनाए हैं:

  • हरी सब्जियों से दूरी: श्रावण (सावन) के दौरान पत्तेदार सब्जियां बिल्कुल न खाएं, क्योंकि बारिश में इन पर सूक्ष्म बैक्टीरिया पनपते हैं।
  • दही और मट्ठे का त्याग: भाद्रपद (भादों) के महीने में डेयरी उत्पादों (विशेषकर दही) से परहेज करें, क्योंकि यह पेट में भारीपन और कफ बढ़ाता है।
  • दूध पर नियंत्रण: आश्विन महीने में दूध का सेवन सीमित या बंद कर देना चाहिए।
  • भारी दालों की मनाही: कार्तिक के महीने में उड़द, चना या तामसिक भोजन खाने से बचें, क्योंकि यह शरीर की ऊर्जा को सुस्त करता है।

2. व्यावहारिक जीवन में ‘सदाचार’ और ‘मौन’

चातुर्मास केवल व्रत रखने का नाम नहीं है, यह अपनी आदतों को सुधारने का मानसिक कैंप है:

  • वाणी पर नियंत्रण: दिन में कम से कम 1 घंटा मौन रहने का अभ्यास करें। दूसरों की आलोचना, झूठ और बेवजह की बहस से दूर रहें।
  • इंद्रिय संयम: पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें और अपनी इच्छाओं पर काबू पाना सीखें।
  • सादा जीवन: इस दौरान जमीन पर चटाई बिछाकर सोने की परंपरा है, जो व्यक्ति को विलासिता से दूर कर जमीन से जोड़ती है।

3. नए और मांगलिक कार्यों पर विराम क्यों?

  • 25 जुलाई से विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नया व्यापार शुरू करने जैसे शुभ कार्य रुक गए हैं।
  • इसका कारण यह नहीं कि यह समय अशुभ है, बल्कि इसलिए है क्योंकि यह समय ‘संचय’ (Saving Energy) का है, ‘खर्च’ (Spending) का नहीं। अपनी ऊर्जा को बाहरी आयोजनों में लगाने के बजाय ध्यान और पूजा में लगाना चाहिए।

4. दैनिक साधना और सेवा

  • मंत्र शक्ति: रोज सुबह स्नान के बाद गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का कम से कम एक माला जाप करें।
  • प्रकृति की सेवा: रोज शाम को घर की सुख-शांति के लिए तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं।
  • दान का महत्व: अपनी कमाई का एक छोटा हिस्सा बेसहारा लोगों को भोजन कराने या गौशाला में हरी घास दान करने में लगाएं।

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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