400 हेक्टेयर वन क्षेत्र खाक
देहरादून: उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी, चढ़ते पारे और शुष्क मौसम के कारण जंगलों की आग (वनाग्नि) ने विकराल रूप धारण कर लिया है। इस सीजन में अब तक 450 से अधिक आग की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिससे 409 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि जलकर खाक हो चुकी है। चमोली जिले में वनाग्नि की चपेट में आने से 2 लोगों की मौत भी हो चुकी है।
बढ़ता संकट और प्रभावित क्षेत्र
राज्य का गढ़वाल मंडल इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित है। चमोली, देहरादून, पौड़ी और रुद्रप्रयाग के जंगलों में आग तेजी से फैल रही है। तेज हवाओं के कारण यह आग सिर्फ चीड़ के पेड़ों तक सीमित न रहकर आबादी, राष्ट्रीय राजमार्गों और स्कूलों के करीब पहुँच गई है। पौड़ी में एक प्राथमिक विद्यालय का भवन इसकी चपेट में आ चुका है। धुएं के भारी गुबार के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में दृश्यता (Visibility) कम हो गई है, जिससे चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
हालात को काबू करने के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। वन विभाग ने कड़ी चेतावनी जारी की है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर आग लगाता है या उसे बुझाने में सहयोग नहीं करता, तो उसके खिलाफ वन अधिनियम के तहत जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी। पूरे राज्य में 5,625 फायर वॉचर्स तैनात किए गए हैं, जिन्हें ₹10 लाख का दुर्घटना बीमा दिया गया है। साथ ही आग बुझाने में मदद करने वाली समितियों को इनाम और प्रोत्साहन राशि देने की योजना बनाई गई है। वन विभाग ने सटीक पूर्वानुमान के लिए मौसम विभाग (IMD) से हाथ मिलाया है और उपग्रह (Satellite) से आग की निगरानी की जा रही है।
तेज हवाओं और सूखे मौसम के कारण आग अब जंगलों से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों की तरफ बढ़ रही है:

पौड़ी गढ़वाल के खिरसू इलाके में जंगल की आग की चपेट में आने से एक बंद पड़ा प्राथमिक विद्यालय का भवन और सरकारी संपत्ति जलकर खाक हो गई।

नैनीताल के कृष्णापुर और भीमताल क्षेत्रों में आग की लपटें रिहायशी इलाकों के बेहद करीब पहुँच गईं, जिससे स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, दमकल और वन विभाग की टीमों ने समय रहते इस पर काबू पा लिया。
- कड़ी सजा की चेतावनी: वन विभाग ने साफ किया है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर आग लगाता है या आग बुझाने में मदद नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और जेल भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
- फायर वॉचर्स की तैनाती: पूरे राज्य में 5,625 फायर वॉचर्स तैनात किए गए हैं और उन्हें ₹10 लाख का दुर्घटना बीमा भी दिया गया है।
- आधुनिक तकनीक की मदद: वन विभाग ने मौसम विभाग (IMD) के साथ समझौता किया है ताकि आग का पूर्वानुमान (Customised Forecast) पहले से मिल सके। इसके साथ ही उपग्रह (Satellite Alerts) के जरिए भी प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है।
