क्या आप जानते हैं कि सनातन परंपरा में हजारों साल पहले ही एक “नेशनल डिटॉक्स मंथ” घोषित कर दिया गया था? जी हां, जिसे हम अधिक मास या मलमास कहते हैं, वह असल में आपके शरीर, मन और आत्मा को पूरी तरह रीसेट (Reset) करने का महीना है!

शास्त्रों और पुराणों का प्रमाण (What Scriptures Say?)

हमारे प्राचीन ग्रंथों और आयुर्वेद में अधिक मास के कड़े नियमों का वैज्ञानिक आधार है:पद्म पुराण और स्कन्द पुराण: इन पुराणों के अनुसार, यह महीना “मल” (शरीर के टॉक्सिंस और मन की बुराइयों) को बाहर निकालने का समय है। इसीलिए इसे ‘मलमास’ भी कहा गया। शास्त्रों में इस महीने भूमि पर सोने, सात्विक भोजन करने और इंद्रिय संयम (self-control) की बात कही गई है, जो सीधे तौर पर आधुनिक ‘डिटॉक्स थेरेपी’ है।

ऋतु परिवर्तन का विज्ञान (Ayurveda Connection):

अधिक मास हमेशा दो बड़ी ऋतुओं के संधिकाल (मिलन) के आस-पास आता है। आयुर्वेद के अनुसार, इस समय शरीर में वात-पित्त-कफ का संतुलन बिगड़ता है। शास्त्रों में इस समय उपवास और कम खाने का नियम इसीलिए बनाया गया ताकि पाचन तंत्र को आराम मिले और बीमारियां न हों।🌿 खुद को डिटॉक्स करने के लिए इस महीने क्या करें? (How to Detox?)यदि आप इस महीने का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं, तो इन 4 आदतों को अपनाएं:इंटरमिटेंट फास्टिंग / एकभुक्त व्रत: शास्त्रों में लिखा है कि इस महीने दिन में केवल एक बार मुख्य भोजन (सूरज ढलने से पहले) करना चाहिए। यह आज की Intermittent Fasting है, जो सेल्स को रीजेनरेट करती है।नो-लहसुन, नो-प्याज (Alkaline Diet): तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मैदा, भारी दालें, बासी खाना) पूरी तरह छोड़ दें। केवल मूंग दाल, खिचड़ी, ककड़ी, गाय का दूध और घी लें। यह आपके लिवर और आंतों को साफ करता है।

मौन और ध्यान (Mental Detox):

दिन में कम से कम 15-30 मिनट मौन (साइलेंस) रहें और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का मानसिक जाप करें। यह आपके स्ट्रेस हार्मोन (Cortisol) को कम करता है।ब्रह्ममुहूर्त स्नान (Circadian Rhythm): सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। यह आपके स्लीप साइकिल और चक्रों को बैलेंस करता है।अधिक मास में डिटॉक्स करने के फायदे (The Benefits)पाचन तंत्र का रीसेट: 30 दिनों तक हल्का खाना खाने से मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है और वजन नियंत्रित रहता है।इम्युनिटी बूस्ट: टॉक्सिंस बाहर निकलने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

मानसिक शांति (Mental Clarity):

गैजेट्स से दूरी और मंत्र जाप से एंग्जायटी (चिंता) दूर होती है और फोकस बढ़ता है।अक्षय पुण्य (Spiritual Growth): शास्त्रों के अनुसार, इस शुद्धिकरण के बाद किया गया कोई भी शुभ काम या दान कई गुना अधिक फल देता है।

अधिक मास अंधविश्वास नहीं, बल्कि आपकी बॉडी और माइंड की ‘सर्विसिंग’ का समय है। इस पुरुषोत्तम मास में खुद को अंदर से शुद्ध बनाएं!
Ye mere kam ka h

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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