पुरुषोत्तम मास: जानें पूरे महीने व्रत रखने के कड़े नियम और पूजा विधि
हिंदू धर्म में अधिक मास, जिसे ‘पुरुषोत्तम मास’ या ‘मलमास’ भी कहा जाता है, आध्यात्मिक शुद्धि का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में किए गए जप, तप और दान का फल अन्य महीनों की तुलना में दस गुना अधिक मिलता है। जो भक्त पूरे 30 दिन का व्रत रखने का संकल्प लेते हैं, उनके लिए शास्त्रों में विशेष अनुशासन बताए गए हैं।
🗓️ व्रत की अवधि (2026)
वर्ष 2026 में अधिक मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इस दौरान भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने के लिए श्रद्धालु पूरे एक महीने का कठिन व्रत रखते हैं।
🕉️ पूरे महीने व्रत करने वालों के लिए मुख्य नियम
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: व्रत का संकल्प लेने वालों को सूर्योदय से कम से कम 1.5 घंटे पहले उठना चाहिए। स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ होता है।
- भूमि शयन: विलासिता का त्याग करते हुए, व्रती को पूरे महीने जमीन पर (कंबल या चटाई बिछाकर) सोना चाहिए।
- आहार का संयम:
- पूरे महीने ‘एकभुक्त’ (दिन में केवल एक बार भोजन) रहने का नियम है।
- भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए। इसमें सेंधा नमक का प्रयोग करें।
- मसूर की दाल, शहद, चावल, राई और तामसिक चीजों (प्याज, लहसुन) का सेवन वर्जित है।
- ब्रह्मचर्य और आचरण: मन, वचन और कर्म से ब्रह्मचर्य का पालन करें। इस दौरान कटु वचन बोलना, झूठ बोलना या किसी की निंदा करना व्रत के फल को नष्ट कर देता है।
- दीप दान का महत्व: घर के मंदिर, तुलसी के पास या पास के किसी विष्णु मंदिर में तिल के तेल या घी का दीपक प्रतिदिन जलाएं।
✨ दैनिक पूजा विधि (Daily Puja Vidhi)
- विष्णु आराधना: सुबह स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने बैठकर व्रत का संकल्प दोहराएं।
- अभिषेक और भोग: भगवान कृष्ण या विष्णु जी को पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें पीले फूल, तुलसी दल और माखन-मिश्री अर्पित करें।
- मंत्र जाप: प्रतिदिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र की कम से कम 11 माला जाप करना अत्यंत फलदायी है।
- कथा श्रवण: प्रतिदिन पुरुषोत्तम मास महात्म्य की कथा या श्रीमद्भागवत पुराण का पाठ करें या सुनें।
🎁 दान का विशेष फल (33 का अंक)
अधिक मास में ’33’ की संख्या का बहुत महत्व है। व्रत के अंत में या महीने के दौरान 33 मालपुओं, 33 फलों या 33 वस्तुओं का दान कांसे के पात्र में रखकर ब्राह्मणों को करने का विधान है। यह दान 33 कोटि देवताओं की प्रसन्नता के लिए किया जाता है।

