न्यूज डेस्क।” छत्तीसगढ़ में अभी कहीं चर्चा हे ता बिजली बिल के दाई। चारों मुढ़ा के लोगन हलाकान हे, काबर के, ए दरी मुफ्त के बिजली योजना सिरा गे हे। आउ बाढ़े बिजली बिल हा सब ला रोवा दे हे।”
1 जुलाई से बिजली बिल की दरों की बदली ने पूरे छत्तीसगढ़ के लोगों का मूड खराब कर दिया है। पंखा, कूलर वाला आम मजदूर भी 1500 से 2000 के बिजली बिल देखकर हैरान हैं वहीं मिडिल क्लास के घरों में 3500 से 5000 हजार बिजली बिल आए हुए हैं। सोशल मीडिया पर जमकर वीडियो वायरल हो रहे हैं। जिसमें लोग भूपेश कका को याद करते और सीएम साय की डबल इंजन के धुएं से हांफते नजर आने का व्यंग्य कस रहे हैं। वहीं महिलाएं कहती फिर रही है कि महतारी वंदन में एक हाथ से सरकार ने पैसे दिए तो दूसरे हाथ से बिजली बिल बढ़ा कर वापस ले लिया।
दसअसल भूपेश कका की सरकार में 400 यूनिट की फ्री बिजली की आदि जनता को भरपूर बिजली उपयोग की आदत पड़ गई थी। राज्य के घरों में कूलर की जगह एसी ने घर बना लिया था। ऐसे में अब वर्तमान साय सरकार ने इसे 100 यूनिट में लाकर खड़ा कर दिया है। पहले से ज्यादा यूनिट यूज करने वाली जनता पहले ही महीने ही बिजली के बिल देख कर हांफ गई है। उपर से ये उमश वाला मौसम जिसमें दो दिन बारिश तो दो दिन धूप, बिना एसी के किसी का काम बन नहीं सकता। मोटे बिजली बिल को देख राज्य के लोग एसी बंद कर कूलर की राह पकड़ रहे हैं।
एलईडी लाइट, स्ट्रिप्ट लाइट की चकाचौंध से चमकने वाले घरों और बाल्कनी में अंधेरा छाया हुआ है।
महंगी बिजली का असर इस बार त्योहारों में भी नजर आने वाला है। पहले मकानों में नवरात्रि से दिवाली की लाइटें लग जाती थीं। पूरा घर लाइटों से जगमगाता था, पर इस बार बिजली बिल की मार छत्तीसगढ़ के लाइट व्यापार पर भी गरजने वाली हैं। इसे देखते हुए इलेक्ट्रिक क्षेत्र के व्यापारियों ने कम माल के आयात का निर्णय लिया है, क्योंकि उन्हें तो पहले ही पता है कि महंगे बिजली की मार में इस बार कोने-ए-च होही जे लाइट खरीदे बर जाही।
अब बात करें सोलर की तो विपक्ष छत्तीसगढ़ सरकार पर यह आरोप लगाती फिर रही है कि सरकार ने अपनी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना को सफल बनाने के लिए जान-बूझकर भूपेश सरकार की योजना को फेल कर दिया, क्योंकि महंगी बिजली बिल को देखकर हर आदमी सोलर पावर की ओर दौड़ेगा।
इधर राज्य सरकार इसे एक बेहतर प्रकृति संतुलित योजना बताती है। जिसमें उनका मानना है कि आम आदमी खुद अपनी छत पर अपनी बिजली बनाएगा और हजारों के बिल से मुक्ती पाएगा। इसी लिए केन्द्र और राज्य मिलकर 1 लाख 8 हजार की सब्सिडी दे रही है। उपर से जीएसटी दरों को 5 प्रतिशत कर दिया गया है जो इसे किफायती बनाती है। अब ये सौर उर्जा के पैनल किस-किस घर की छत में लहराएंगे, क्या जनता किफायती दरों और महंगी बिजली बिल से ऐसे राहत पाएगी यह तो समय ही बताएगा।
लेकिन आपको बता दें कि मुफ्त बिजली तो अब मिलने से रही इसलिए हर हाल में आम जनता की जेब ढीली या तो इधर होगी या तो उधर।
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