नई दिल्ली/फरीदाबाद:
इस साल दीपोत्सव पर तिथियों का एक बेहद दुर्लभ और अद्भुत संयोग देखने को मिल रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 8 नवंबर (रविवार) को ही रूप चौदस (नरक चतुर्दशी) का पवित्र ‘अभ्यंग स्नान‘ किया जाएगा और इसी दिन शाम को मुख्य त्योहार ‘दिवाली‘ (लक्ष्मी पूजन) भी धूमधाम से मनाया जाएगा। इस संयोग के कारण त्योहार की खुशियां और भी दोगुनी हो गई हैं। [1, 2]
तिथियों का गणित और महत्व:
चतुर्दशी तिथि रविवार, 8 नवंबर की सुबह 11:27 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, नरक चतुर्दशी का स्नान सूर्योदय से पहले चंद्रोदय के समय किया जाता है, इसलिए 8 नवंबर की सुबह 05:41 से 06:38 के बीच अभ्यंग स्नान का सबसे शुभ मुहूर्त है। इसके बाद दोपहर से अमावस्या तिथि शुरू हो जाएगी, जो शाम के समय प्रदोष काल में व्याप्त रहेगी। यही कारण है कि 8 नवंबर की शाम को ही माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का मुख्य पूजन (दिवाली) संपन्न होगा। इससे पहले, 7 नवंबर (शनिवार) की शाम को यम दीपदान और काली चौदस की पूजा की जाएगी। [1, 2, 3, 4, 5]
8 नवंबर की संपूर्ण दिनचर्या (पूजा विधि):
- सूर्योदय से पहले (सुबह): नींद से उठकर पूरे शरीर पर तिल के तेल की मालिश करें। इसके बाद बेसन, हल्दी, चंदन और कच्चे दूध से बना विशेष उबटन लगाकर स्नान करें। पानी में अपामार्ग (चिचड़ी) के पत्ते जरूर डालें। मान्यता है कि इससे सौंदर्य बढ़ता है, बीमारियां और दरिद्रता दूर होती हैं।[1]
- शाम को (लक्ष्मी पूजन): घर को साफ-सुथरा और सुसज्जित कर, प्रदोष काल (शाम 05:54 से 07:50 के बीच) में पूरे विधि-विधान से माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर जी की पूजा करें। घर के कोने-कोने में दीये जलाकर महालक्ष्मी का स्वागत करें। [1]
