उत्तरकाशी (उत्तराखंड)। देवभूमि उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम के बदले मिजाज और अचानक हुई भारी बर्फबारी ने पर्वतारोहियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तरकाशी जिले के दुर्गम ट्रैकिंग रूट्स पर इस समय 136 पर्वतारोही और ट्रैकिंग दल के सदस्य फंसे हुए हैं। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए युद्धस्तर पर हवाई और जमीनी रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

🚨 कहाँ और कैसे फंसे हैं पर्वतारोही?

जिला प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, अचानक बिगड़े मौसम और भारी बर्फबारी के कारण रास्ते बंद हो गए हैं, जिससे ट्रेकर्स आगे बढ़ने या वापस लौटने में असमर्थ हैं।

  • हाई-एल्टीट्यूड अभियान दल: एक बड़े ट्रैकिंग अभियान पर निकले 89 सदस्य सबसे ऊंचे इलाकों में फंसे हैं।
  • कालिंदी पास (Kalindi Pass): समुद्र तल से बेहद ऊंचाई पर स्थित कालिंदी पास के बेस कैंप में 18 लोग फंसे हुए हैं।
  • ऑडिन कोल पास (Auden’s Col Pass): हिमालय के सबसे खतरनाक पास में से एक, ऑडिन कोल के बेस कैंप में 29 ट्रेकर्स और सहयोगी स्टाफ फंसे हुए हैं।

🚁 आसमान से निगरानी, ज़मीन पर मुस्तैदी

सोमवार सुबह मौसम में थोड़ा सुधार होते ही जिलाधिकारी के निर्देश पर हेलीकॉप्टरों के जरिए हवाई रेकी (Reconnaissance) शुरू कर दी गई है। मौसम साफ रहते ही हवाई मार्ग से एयरलिफ्ट करने की तैयारी है।

  • संयुक्त रेस्क्यू टीमें: आपदा प्रबंधन विभाग, SDRF, NDRF, स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीमें अलर्ट पर हैं।
  • NIM की विशेषज्ञता: दुनिया के प्रतिष्ठित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) के रेस्क्यू एक्सपर्ट्स को भी इस ऑपरेशन में शामिल किया गया है, जो उच्च हिमालयी क्षेत्रों में खोज कार्य के विशेषज्ञ माने जाते हैं।

📦 सैटेलाइट फोन से संपर्क, पहुंचाई जा रही राहत सामग्री

प्रशासन के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि फंसे हुए दलों से सैटेलाइट फोन के जरिए संपर्क स्थापित हो चुका है। सभी पर्वतारोही अभी सुरक्षित बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों के लिए भोजन, गर्म कपड़े, ऑक्सीजन सिलेंडर और जरूरी दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं।

इसके साथ ही, गंगोत्री नेशनल पार्क के निचले इलाकों (भोजवासा और चीड़बासा) में फंसे सामान्य पर्यटकों को वन विभाग की टीमों ने पहले ही रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है

By Pooja Patel

प्रोड्यूसर एंड सब एडिटर डेली हिन्दी मिलाप हैदराबाद, दैनिक भास्कर, नई दुनिया, भास्कर भूमि, राजस्थान पत्रिका में 14 वर्ष का कार्यानुभव

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