नई दिल्ली: हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का त्योहार बेहद विशेष और कल्याणकारी माना जाता है. इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है और उनके पूजा में चढ़ाए गए १४ गांठों के धागे को विशेष रूप से कलाई पर बाँधा जाता है . इसके अतिरिक्त, यह दिन 10 दिनों से चले आ रहे गणेश उत्सव का समापन भी है, जब बेहद भावुक मन से गणपति बप्पा को विदाई (गणेश विसर्जन) दी जाती है. वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी. [1, 2, 3, 4, 5]
आइए जानते हैं अनंत चतुर्दशी की तिथि, पूजा के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और बप्पा की विदाई का सही तरीका।
📅 अनंत चतुर्दशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Anant Chaturdashi 2026 Muhurat)
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 24 सितंबर 2026 को रात 11:18 बजे से होगी और इसका समापन 25 सितंबर 2026 को रात 11:06 बजे होगा. उदया तिथि के नियमों के कारण व्रत और पूजा 25 सितंबर को ही की जाएगी. [1, 2]
- अनंत चतुर्दशी मुख्य पूजा मुहूर्त: सुबह 06:11 बजे से सुबह 11:06 बजे तक. [1]
- इस साल यह पर्व रवि योग में आ रहा है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में बेहद फलदायी माना जाता है. [1]
🕒 गणपति विसर्जन के शुभ मुहूर्त (Ganesh Visarjan 2026 Timings)
25 सितंबर को पूरे दिन बप्पा की विदाई के लिए कई शुभ चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध हैं: [1, 2]
- प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): सुबह 06:11 बजे से सुबह 10:42 बजे तक.
- अपराह्न मुहूर्त (शुभ): दोपहर 12:13 बजे से दोपहर 01:43 बजे तक.
- सायाह्न मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर): शाम 04:44 बजे से शाम 06:14 बजे तक.
- रात्रि मुहूर्त (लाभ): रात 09:14 बजे से रात 10:43 बजे तक. [1]
🧵 14 गांठ वाले अनंत धागे का महत्व (Significance of 14 Knots Anant Sutra)
अनंत चतुर्दशी की पूजा में रेशम या सूत के धागे को कुमकुम और हल्दी से रंगकर उसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं. इसे अनंत सूत्र कहा जाता है.[1, 2, 3, 4]
- 14 लोकों का प्रतीक: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये 14 गांठें भगवान विष्णु द्वारा निर्मित 14 लोकों (भूलक, भुवलोक, स्वलोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक, सत्यलोक, अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल) का प्रतीक मानी जाती हैं. [1, 2]
- कष्टों से मुक्ति: माना जाता है कि प्रत्येक गांठ में श्री हरि विष्णु का वास होता है. पूजा के बाद पुरुष इसे अपने दाएं हाथ पर और महिलाएं अपने बाएं हाथ की कलाई पर बांधती हैं. इसे धारण करने से जातक की सभी परेशानियां दूर होती हैं और अनंत सुखों की प्राप्ति होती है. [1, 2]
🛐 अनंत चतुर्दशी व्रत और पूजा विधि (Puja Vidhi)
- संकल्प लें: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें.
- कलश स्थापना: पूजा स्थल की सफाई करके वहां कलश स्थापित करें और भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति रखें.
- अनंत धागा तैयार करें: सूत के धागे में कुमकुम-हल्दी लगाकर 14 गांठें लगाएं और इसे भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें.
- पूजन सामग्री: भगवान को रोली, अक्षत, चंदन, धूप, दीप, फूल, पंचामृत और तुलसी दल चढ़ाएं. प्रसाद के तौर पर मीठी पूरी या हलवा भोग लगाएं.
- कथा व रक्षासूत्र: व्रत कथा सुनें अथवा पढ़ें और अंत में ‘ॐ अनंताय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए रक्षासूत्र कलाई पर बांध लें. [1, 2, 3, 4]
📖 अनंत चतुर्दशी व्रत पौराणिक कथा (Vrat Katha)
महाभारत काल से जुड़ी इस कथा के अनुसार, सुशीला नामक एक संस्कारी स्त्री का विवाह ऋषि कौंडिन्य से हुआ था. सुशीला ने एक बार अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा और अपनी कलाई पर 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांध लिया. इस व्रत के प्रभाव से उनके घर में अपार धन, सुख और समृद्धि आ गई. [1]
एक दिन ऋषि कौंडिन्य की नजर उस धागे पर पड़ी। उन्होंने इसे जादू-टोना या स्त्री का घमंड समझकर तोड़ दिया और आग में फेंक दिया। ऐसा करने से भगवान अनंत (विष्णु जी) का अपमान हुआ और देखते ही देखते ऋषि की पूरी संपत्ति नष्ट हो गई और वे घोर दरिद्रता में आ गए।
अपनी भूल का अहसास होने पर ऋषि कौंडिन्य ने वन में जाकर कई वर्षों तक भगवान विष्णु की कठिन तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और बताया कि वह अनंत सूत्र स्वयं उनका रूप था। इसके बाद ऋषि ने फिर से 14 वर्षों तक पूरी श्रद्धा से अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा, जिससे उनका खोया हुआ वैभव और सुख-समृद्धि वापस लौट आई. [1]
